बरसात में ढह गया था पीड़ित परिवार का मकान, सुविधा शुल्क न मिलने पर सरकारी मदद की कार्रवाई ठप करने का आरोप
मुजफ्फरनगर। गांव ज्ञान माजरा रोडना में पिछले दिनों हुई भयंकर बरसात ने एक परिवार का आशियाना छीन लिया था। प्रशासनिक उदासीनता और कथित सुविधा शुल्क की मांग के कारण परिवार को कोई भी सरकारी मदद नहीं मिली और यह परिवार अब तक खुले आसमान के नीचे ठंड में रातें बिताने को मजबूर है। हालात का संज्ञान लेते हुए भारतीय किसान यूनियन के नेता विकास शर्मा मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार के साथ रात गुजारकर प्रशासन को कार्रवाई के लिए बाध्य कर दिया। आधी रात ही अफसर मौके पर पहुंचे। परिवार को निजी स्तर पर त्वरित आर्थिक मदद दी और एक माह में कार्रवाई पूर्ण करने का भरोसा दिया गया।

जानकारी के अनुसार गांव ज्ञान माजरा रोडना का निवासी मोनू पुत्र पूरण सिंह पिछले दिनों हुई भारी बरसात में अपना मकान खो बैठा था। छत गिरने के बाद से परिवार खुले आसमान के नीचे जिंदगी बिताने को मजबूर है। ग्रामीणों के अनुसार, इस दुर्घटना की सूचना तत्काल जिले के आला अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन तहसील स्तर पर कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से सुविधा शुल्क न मिलने के कारण मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। यही कारण रहा कि परिवार की कोई रिपोर्ट संतोषजनक रूप से दर्ज नहीं हो पाई और प्रशासनिक मदद भी नहीं पहुंची। परिवार की बदहाली की जानकारी मिलने पर भारतीय किसान यूनियन के नेता विकास शर्मा बीती रात पीड़ित परिवार के आश्रय स्थल पर पहुंचे। उन्होंने रातभर वहीं खुले आसमान के नीचे परिवार के साथ समय बिताया और घोषणा की कि जब तक परिवार के लिए स्थायी आवास का निर्माण शुरू नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। शर्मा ने आरोप लगाया कि जब शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंची तो पटवारी ने भी तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर मामला कमजोर करने की कोशिश की।
इसी दौरान रात 12 बजे प्रशासन हरकत में आया और मौके पर तीन नायब तहसीलदारकृहरेंद्र पाल, अमित कुमार और सुनील कुमार तथा चरथावल कोतवाल सत्यनारायण दहिया पहुंचे। अधिकारियों ने तुरंत राहत प्रदान करते हुए पीड़ित परिवार को पास के एक पड़ोसी के मकान में एक सप्ताह के लिए शिफ्ट करने की व्यवस्था कराई। साथ ही यह आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के भीतर परिवार का नया घर तैयार करने के लिए कार्रवाई को पूर्ण कर दिया जाएगा। तात्कालिक राहत के रूप में चरथावल कोतवाल सत्यनारायण दहिया द्वारा 5100, और भाकियू नेता विकास शर्मा द्वारा भी 5100 रुपये की आर्थिक सहायता पीड़ित परिवार को प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त रूपक चौधरी ने भी 2000 की मदद दी, ताकि परिवार अपनी अस्थायी व्यवस्था और आवश्यक जरूरतों को पूरा कर सके। भारी सर्दी के बीच खुले आसमान में रहने को मजबूर यह परिवार अब प्रशासन से मिले आश्वासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि भाकियू नेता हस्तक्षेप न करते, तो शायद प्रशासन अभी तक भी जागता नहीं।






