मुंबई- महाराष्ट्र में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की एक विशेष अदालत ने नीरव मोदी, विजय माल्या और मेहुल चोकसी को पकड़ने में विफलता के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की खिंचाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने चार्टर्ड अकाउंट व्योमेश शाह की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने विदेश यात्रा के लिए अदालत की पूर्व अनुमति को खत्म करने की मांग की थी। शाह पर गरवारे इंडस्ट्रीज के निहाल गरवारे के लिए धन शोधन का आरोप है, जिसे पिछले साल बीकेसी में एक संपत्ति सौदे के माध्यम से जेएंडके बैंक को एक सौ करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। शाह ने जमानत आदेश में संशोधन की मांग करते हुए विशेष अदालत का रुख किया था जिसमें उन्हें अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने के लिए कहा गया था। उन्होंने दलील दी कि उनका काम ऐसा है कि उन्हें ग्राहकों और काम की तलाश में विभिन्न देशों की यात्रा करनी पड़ती है और हर बार अदालत की अनुमति लेना उनके लिए व्यवहारिक नहीं है। इस याचिका का ईडी अभियोजक ने विरोध किया और दलील दी कि इस तरह की व्यापक अनुमति नहीं दी जा सकती और इससे कारोबारी नीरव मोदी, माल्या और चोकसी के मामलों जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। इससे नाराज विशेष न्यायाधीश एमजी देशपांडे ने ईडी के दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि “ये सभी व्यक्ति उन्हें उचित समय पर गिरफ्तार नहीं करने में संबंधित जांच एजेंसियों की विफलता के कारण भाग गए।”

एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका पर आपत्तिजनक सामग्री, किताबें वापस लेने के निर्देश
एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका पर आपत्तिजनक सामग्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को हुई सुनवाई में भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने इसे “गहरी और सोची-समझी साजिश” करार देते हुए जांच के निर्देश दिए। कोर्ट ने सभी प्रतियां वापस लेने और दो सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। स्कूल शिक्षा पाठ्यक्रम के लिए जिम्मेदार एनसीईआरटी ने वेबसाइट से पुस्तक हटाने के कुछ घंटों बाद ही उसका वितरण भी रोक दिया। संस्था ने ‘अनुचित सामग्री’ के लिए माफी मांगते हुए कहा है कि संबंधित पुस्तक को उपयुक्त अधिकारियों के परामर्श से फिर से लिखा जाएगा। क्या है पूरा मामला? एनसीईआरटी की





