मुजफ्फरनगर। 15 साल पहले विभागीय स्तर पर करीब सौ करोड़ रुपये का घोटाला खोलकर देश और प्रदेश में सनसनी फैलाकर रख देने वाले तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपने जज्बे और दृढ़ संकल्प से संकटों को पछाड़ते हुए एक नई राह और मिसाल कायम की है। रिंकू सिंह राही ने एक आईएएस अफसर के रूप में सीएम योगी से अपने गु्रप के साथ मुलाकात की। अब उनका मुजफ्फरनगर में प्रशिक्षु आईएएस के तौर पर इंतजार हो रहा है।
भारतीय प्रशासनिक सेवा 2023 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने मंगलवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके आवास पर पहुंचकर मुलाकात की। इन अधिकारियों में मुजफ्फरनगर में करीब 15 साल पहले जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात रहे रिंकू सिंह राही भी शामिल रहे। रिंकू राही भी 2023 बैच के आईएएस अफसरों में चुने गये हैं। उन्होंने भी अपने बैचमेट अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। रिंकू सिंह राही ने विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए जीवन में युवाओं के लिए एक मिसाल कायम की है। उन्होंने 15 साल पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने के कारण अपने ऊपर हुए जानलेवा हमले के बाद कहा था कि एक दिन मैं आईएएस अधिकारी बनकर मुजफ्फरनगर जनपद आऊंगा और अब माना जा रहा है कि रिंकू सिंह राही जल्द ही प्रशिक्षु आईएएस के तौर पर इस जनपद में भेजे जा सकते हैं।
रिंकू सिंह राही का जन्म 20 मई 1982 को अलीगढ़ में एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अलीगढ़ में की और 2002 में एनआईटी, जमशेदपुर से मेटल वर्क में बीटेक की डिग्री पूरी की। उसी वर्ष, उन्होंने गेट में अखिल भारतीय स्तर पर 17वीं रैंक हासिल की, जिसने उन्हें किसी भी शीर्ष तकनीकी संस्थान में अपनी पसंदीदा स्ट्रीम में सीट सुनिश्चित करने का अधिकार दिया, लेकिन उन्होंने इसके बजाय सिविल सेवा करियर को चुना। अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने विभिन्न सिविल सेवा परीक्षाएं दीं। इसी प्रयासों में दो साल के परिश्रम के बाद 2004 में उत्तर प्रदेश प्रांतीय सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, उन्हें 2008 में मुज़फ़्फ़रनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया। पहली पोस्टिंग और युवा जोश होने के कारण रिंकू सिंह राही ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना शुरू किया और आते ही पिछले पांच वर्षों में विभागीय योजनाओं में धन वितरण की जांच के आदेश दिए। इस जांच में उन्होंने गंभीर विसंगतियां पाई और समाज कल्याण विभाग में करोड़ों का घोटाला उजागर किया। राही की शिकायतों के बाद, हथियारबंद बदमाशों ने 26 मार्च 2009 की शाम आर्य समाज रोड स्थित अधिकारी कालोनी में अपने आवास के बाहर बैडमिंटन खेलते समय उन पर हमला किया और उनके शरीर में छह गोलियां लगी। उनका जबड़ा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उन्होंने एक आंख की दृरोशनी भी खो दी, लेकिन बच गए। इस हमले में एक नेता और विभागीय एकाउंटेंट व अन्य कर्मचारियों सहित नौ लोग जेल भेजे गये थे। उच्च स्तरीय जांच टीम गठित की गई, लेकिन मामला ढुलमुल ही रहा। इसके 15 साल बाद अब वो एक आईएएस अधिकारी बनकर मुजफ्फरनगर लौटने की तैयारी में हैं।






