पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसलाः मासूम से दुष्कर्म और वीडियो बनाने के दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना
मुजफ्फरनगर। जनपद की एक विशेष अदालत ने 13 वर्षीय बालिका के साथ हुए जघन्य अपराध में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को अंतिम सांस तक जेल की सलाखों के पीछे रहने की सजा सुनाई है। पॉक्सो कोर्ट संख्या-2 की न्यायाधीश दिव्या भार्गव ने शुक्रवार को मंसूरपुर थाना क्षेत्र के एक पुराने मामले में आरोपी हसन चौधरी और उसकी सहयोगी महिला शकीला को दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है।
मामला मुजफ्फरनगर के थाना मंसूरपुर क्षेत्र का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोषियों ने 13 साल की एक मासूम बालिका को अपनी हवस का शिकार बनाया था। मुख्य आरोपी हसन चौधरी पुत्र अयूब ने बालिका के साथ बलात्कार की वारदात को अंजाम दिया, जबकि इस घिनौने कृत्य में शकीला पत्नी रशीद ने उसका पूरा सहयोग किया। संवेदनहीनता की हद पार करते हुए आरोपियों ने इस पूरे अपराध का वीडियो भी बनाया था, जिसे बाद में साक्ष्य के रूप में महत्वपूर्ण माना गया।
इस मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो कोर्ट संख्या-2 में न्यायाधीश दिव्या भार्गव के समक्ष हुई। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक (शासकीय अधिवक्ता) विनय कुमार अरोरा ने मजबूत पैरवी की। उन्होंने अदालत के समक्ष पीड़िता के बयान, चिकित्सीय साक्ष्य और वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत किए। शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि मासूम के साथ किया गया यह कृत्य समाज के माथे पर कलंक है और दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद, न्यायाधीश दिव्या भार्गव ने हसन चौधरी और शकीला को दोषी पाया। शुक्रवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए दोनों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माने की राशि अदा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी।






