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जाटों ने भरी हुंकार, केन्द्र में आरक्षण की दरकार

जाट महासभा के बैनर तले सिसौली में जाट आरक्षण और सामाजिक मुददों पर आयोजित हुई महापंचायत में राजनीति से शिक्षा तक हुई बात, पूर्व मंत्री संजीव बालियान बोले-पश्चिम में बालिका विश्वविद्यालय की आवश्यकता, आगे आये जाट समा

जाटों ने भरी हुंकार, केन्द्र में आरक्षण की दरकार
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मुजफ्फरनगर। जाट महासभा के बैनर तले एक बार फिर से केन्द्रीय सेवाओं में समाज को आरक्षण दिलाये जाने के लिए जाट समाज में एक नई ताजगी नजर आई। रविवार को किसान राजधानी के रूप में मशहूर जनपद के कस्बा सिसौली में एक महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें राजनेताओं, किसान नेताओं और खाप चैधरियों के साथ ही अन्य क्षेत्रों में सक्रिय जाट समाज के प्रमुख लोगों के साथ दूर दराज से आये जाटों ने अपनी भागीदारी दर्शाकर इस लड़ाई को नई अंगडाई देने का इशारा किया। इसी मंच पर पहुंचे पूर्व केन्द्रीय मंत्री डाॅ. संजीव बालियान ने राजनीतिक ताकत में पिछड़ने के कारण समाज को आईना दिखाकर किसी के साथ मिल जाने का रास्ता दिखाया तो वहीं समाज से बालिका शिक्षा के लिए बड़े निर्णय लेने का आह्नान किया। वहीं दूसरे वक्ताओं ने सामाजिक कुरीतियों के खात्मे के लिए खाप चैधरियों से अपने घर से दहेज प्रथा, नशाखोरी और मृत्यु भोज जैसे प्रबंधों पर पाबंदी की शुरूआत करने पर जोर दिया।

सिसौली में आयोजित जाट महासभा की महा पंचायत में पूर्व केन्द्रीय मंत्री डाॅ. संजीव बालियान ने महापंचायत को सम्बोधित करते हुए कहा कि जनपद जाट महासभा मुजफ्फरनगर ने कई माह की मेहनत कर समाज को अपने अधिकारों और युवाओं को नई दिशा देने के लिए सराहनीय प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि इस महापंचायत में जाट आरक्षण और सामाजिक मुद्दों को लेकर मंथन हो रहा है, लेकिन मैं आज उस मुद्दे को इस मंच के माध्यम से समाज के सामने रखना चाहता हूं, जिसको मैंने काफी समय से महसूस किया है। सामाजिक उत्थान के लिए शिक्षा के क्षेत्र में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लेने की आवश्यकता है और इसमें खासकर लड़कियों की शिक्षा के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसी भी जनपद में बालिका विश्वविद्यालय की स्थापना की आवश्यकता महसूस हो रही है। पहले सोनीपत, हरियाणा में यहां की बालिकाएं अपनी शिक्षा के लिए जाती थी, वहां पर विश्वविद्यालय बन जाने के कारण अब यहां की बालिकाओं को शिक्षा के लिए राजस्थान जाना पड़ रहा है। मैंने पहले काफी प्रयास किये कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बालिका विश्वविद्यालय बन जाये। इसमें सफलता नहीं मिल पाई। आज यहां पर कोई भी एक ऐसी शिक्षण संस्था नहीं है, जहां पर 15-20 बीघा का सीमांत किसान अपनी बच्चियों को बेहतर शिक्षा दिलाने का काम कर सके, जहां पर मुनाफाखोरी न हो। पहले बात आई थी कि हमारे ही पडौस में काफी जमीन है। समाज को बालिका के विश्वविद्यालय के लिए सोचना होगा और अपनी जमीन देने के लिए तैयार होना पड़ेगा। पूर्व मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि शिक्षा से ही सामाजिक उत्थान है, शिक्षा के बिना समाज आगे नहीं बढ़ सकता है और समाज के युवा शिक्षा के क्षेत्र में आगे आये हैं, खेती के साथ ही व्यापार के क्षेत्र में भी समाज का युवा बढ़ रहा है। शिक्षा ही सामाजिक स्तर पर सबसे बड़ा मुद्दा है। संजीव बालियान ने मंच पर राजनीतिक रूप से पिछड़ेपन को भी मुखरता के साथ उठाते हुए उन्होंने कहा कि जाट समाज मूल रूप से किसान था, लेकिन शिक्षा, खेती और व्यापार में आगे बढ़ने के साथ ही जाट समाज राजनीतिक क्षेत्र में पिछड़ रहा है। पहले के मुकाबले जो वजूद राजनीति में जाट समाज ने बनाया था, उसमें कहीं न कहीं कमी आई है। उन्होंने कहा कि कभी भी कोई एक समाज कोई प्रमुख राजनीतिक परिणाम नहीं दे सकता है। राजनीतिक ताकत पाने के लिए उन्होंने समन्वय का फार्मूला सुझाते हुए कहा कि या तो किसी के साथ मिल जाओ या किसी को अपने साथ मिला लो, यहां सबका सहयोग करके ही चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि चैधरी चरण सिंह जो हमारे सबसे बड़े नेता रहे हैं, उनका प्रभाव क्षेत्र भी सम्पूर्ण उत्तर भारत था और उत्तर प्रदेश में हमारा समाज तो केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ही है, इसके बावजूद भी उनका सम्मान पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कम नहीं था। इसका कारण यही था कि वो केवल जाट समाज के नहीं बल्कि किसान बिरादरी के नेता थे। उन्होंने भाकियू संस्थापक अध्यक्ष महेन्द्र सिंह टिकैत के प्रभाव का भी याद करते हुए कहा कि वो देशव्यापी नेता थे। वो प्रभावशाली किसान नेता थे, वो एक क्षेत्र के नेता कभी नहीं रहे। उनका प्रभाव और उनकी आवाज की गूंज वहां तक थी, जहां तक हमारा समाज कभी नहीं रहा।

महापंचायत में अन्य वक्ताओं ने सामाजिक कुरीतियों को लेकर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि नशाखोरी, दहेज प्रथा और मृत्यु भोज के खिलाफ आवाज उठाई गई। इसके लिए खाप चैधरियों को एक समन्वय के साथ समाज को मार्गदर्शन देने के लिए कहा गया है। समाज में युवाओं को सुधारने के लिए बुजुर्गों से हुक्का परम्परा को लाने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही सामाजिक सुधार के लिए संयुक्त परिवार की परम्परा को जीवित करने की बात भी कई वक्ताओं ने रखते हुए परिवार में युवाओं से बुजुर्गों को सम्मान देने के लिए प्रेरित किया गया। एक वक्ता ने कहा कि सामाजिक सुधार और कुरीतियों पर पाबंदी समाज में तभी लागू हो सकती हैं, जबकि समाज के चैधरी और खाप के मुखिया अपने घरों से ही इसकी शुरूआत करें, समाज पर प्रभाव के लिए यही जरूरी है। महापंचायत की अध्यक्षता बालियान खाप के मुखिया चै. नरेश टिकैत ने की तथा संचालन जयवीर सिंह द्वारा किया गया। यहां मुख्य रूप से किसान नेता चै. यु(वीर सिंह, पूर्व विधायक भरत सिंह सम्भालका, कुलदीप अहलावत हरियाणा, बिजेन्द्र तोमर, संजीव आर्य, बिट्टू सिखेडा, ब्रजवीर सिंह, जगराम सिंह चैधरी अलीगढ़, चै. सौदान सिंह थाम्बा चैधरी, प्रमोद प्रधान हडोली, दीपक राठी, उत्तम राठी इटावा, मेहर सिंह, सतीश सरपंच हरियाणा, सुधीर सिंह सहित अन्य प्रमुख लोग मौजूद रहे।

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