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MUZAFFARNAGAR-करोड़ों की जमीन हड़पने को चार बहनों ने बदल डाली मां

चकबंदी विभाग के लेखपाल, कानूनगो और जिला पंचायत की सदस्या के साथ मिलकर रचा गहरा फर्जीवाडा, पांच महिलाओं सहित आठ के खिलाफ मुकदमा दर्ज

MUZAFFARNAGAR-करोड़ों की जमीन हड़पने को चार बहनों ने बदल डाली मां
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मुजफ्फरनगर। करोड़ों रुपये कीमत की 1.911 हेक्टेयर कृषि भूमि को कब्जाने के लिए एक गहरी साजिश रची गई। एसडीएम कोर्ट से हाईकोर्ट तक लंबी लड़ाई लड़ने पर जब कब्जा अधिकार नहीं मिली तो चार बहनों ने अपनी मां को ही बदल दिया और चकबंदी विभाग के कुछ लोगों के साथ मिलकर भूमि के दस्तावेजों में हेरा-फेरी करते हुए मालिकाना हिस्सेदार बनकर दावा कर दिया। इस मामले में बहनों की असली मां से कृषि भूमि खरीदने वाले व्यक्ति ने पुलिस से निराशा होकर कोर्ट के आदेश पर फर्जीवाडा करने वाली चारों बहनों, लेखपाल, कानूनगो, जिला पंचायत सदस्या और ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इसके बाद चकबंदी विभाग में हड़कम्प मचा हुआ है। एफआईआर होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

जनपद गाजियाबाद में परिवार के साथ रह रहे मूल रूप से गांव रोहाना खुर्द निवासी जितेन्द्र कुमार त्यागी पुत्र स्व. गुरूवचन सिंह त्यागी 29 साल पहले खरीदी गई कृषि भूमि पर कब्जा पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। अब उनकी खरीदी गई भूमि पर अवैध रूप से काबिज होकर इसको हड़पने के लिए एक ऐसी साजिश रची गई, जिसमें सरकारी तंत्र से लेकर सामाजिक रिश्तों की तमाम व्यवस्था को तार-तार करते हुए बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया। इसके खिलाफ कार्यवाही करने के लिए जितेन्द्र त्यागी ने पुलिस की चौखट पर दस्तक दी, लेकिन निराशा मिलने पर वो कोर्ट पहुंचे और सीजेएम के आदेश पर अब पुलिस ने उनकी शिकायत को दर्ज करते हुए कानूनी कार्यवाही शुरू की है।

जितेन्द्र त्यागी की तहरीर पर थाना सिविल लाइन में कोर्ट के आदेश पर लेखपाल, कानूनगो, ग्राम पंचायत सचिव समेत आठ के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गयी है। मामला साल 1996 का है। बकौल जितेन्द्र त्यागी उनके पिता गुरूवचन सिंह और माता विमला देवी ने 1996 में रोहाना खुर्द की ही निवासी शान्ति देवी पत्नी मंगत सिंह त्यागी से कृषि भूमि की खरीद का सौदा किया। इसमें रोहाना खुर्द में उनकी खसरा नम्बर 1175 व मौजा देशलपुर स्थित खसरा नम्बर 2 के तहत कुल रकबई 1.911 हेक्टेयर भूमि खरीदी और दोनो भूमि के लिए 21 मई 1996 और 07 जून 1996 को बैनामा करा लिया था। इसके उपरांत साल 2002 में उनके माता पिता द्वारा खरीदी गई भूमि पर मूर्ति देवी जोकि मंगत राम त्यागी की सेविका के तौर पर परिवार में रह रही थी, ने अपने कब्जे का दावा एसडीएम कोर्ट में शांति देवी के खिलाफ कर दिया था। इसमें 2002 से 2019 तक एसडीएम कोर्ट से हाईकोर्ट तक मूर्ति देवी ने यही पैरवी की, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली और शान्ति देवी को ही उक्त भूमि का काननून कब्जेदार माना गया।

जितेन्द्र त्यागी का कहना है कि मूर्ति देवी ने 2005 में एक फर्जी अपंजीकृत वसीयत बनवाई, जिसमें उसने खुद को मंगत सिंह की दूसरी पत्नी दर्शाते हुए भूमि पर दाखिल खारिज का आदेश तहसीलदार सदर से प्राप्त कर लिया। अपर आयुक्त सहारनपुर मण्डल ने सितम्बर 2014 को यह आदेश निरस्त कर दिया। अगस्त 2018 में मूर्ति देवी का देहान्त हो गया। इसी साल रोहाना खुर्द में शासन से चकबंदी नोटिफिकेशन जारी हो गया और तहसील सदर से रोहाना खुर्द के तमाम राजस्व अभिलेख सहायक चकबंदी अधिकारी सोल्जर बोर्ड में स्थानांतरित हो गये। आरोप है कि इसी में बड़ा खेल हुआ। उक्त विवादित भूमि को अविवादित दर्शाते हुए चकबंदी लेखपाल सन्नी तंवर, कानूनगो गोविन्द, शांति देवी की चार पुत्रियों सरोज बाला, संतोषवती, ब्रिजेश और अनिता त्यागी, ग्राम पंचायत सचिव रोहाना खुर्द और जिला पंचायत सदस्या गुड्डी त्यागी ने आपसी साज करते हुए रोहाना खुर्द के परिवार रजिस्टर में स्व. मंगत सिंह की विवाहित पत्नी शांति देवी का नाम हटवाकर मृतका मूर्ति देवी का नाम अंकित करा दिया और चारों बहनों ने अपनी मां शांति देवी की बजाये अपने पिता की सेविका मूर्ति देवी की बेटी होने का दावा किया, जबकि मूर्ति देवी आजीवन निःसंतान रही। आरोप है कि चारों बहनों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर उक्त भूमि को हड़पने के लिए पूरी साजिश रची और कूटरचित दस्तावेज के आधार पर चकबंदी खतौनी में खुद को उक्त भूमि में वारिस दर्ज करा लिया। इस तरह से पिता और माता के द्वारा बेच दी गई संपत्ति को हड़पने के लिए चार सगी बहनों ने अपनी मां को ही बदलने का काम कर दिखाया।

थाना प्रभारी सिविल लाइन आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि शहर कोतवाली के गांव रोहाना खुर्द निवासी जितेंद्र कुमार त्यागी हाल निवासी वसुंधरा जिला गाजियाबाद ने कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई है। उसने बताया कि उसके माता पिता ने कृषि भूमि शांति देवी से खरीदी थी, जिस पर कब्जे को लेकर मूर्ति देवी व शांति देवी में विवाद चल रहा था। इसका मुकदमा एसडीएम सदर की कोर्ट में चला। एसडीएम ने शांति देवी के पक्ष में फैसला सुनाया था लेकिन इस बीच आरोपियों ने लेखपाल, कानूनगो व ग्राम पंचायत सचिव के साज कर जमीन को अपने नाम करा लिया था। सभी आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गयी है।

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