एमआईटूसी कंपनी के साथ अब काम नहीं करेगी पालिका

मुजफ्फरनगर। शहर को स्वच्छ बनाये रखने के लिए नगरपालिका परिषद् की चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में 55 वार्डों में शुरू किया गया डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कार्य पालिका ने जारी रखने का निर्णय लिया है, लेकिन इसके लिए दिल्ली की कंपनी एमआईटूसी के विवादित होने और सभासदों के द्वारा बोर्ड मीटिंग में कंपनी के खिलाफ कड़ी नाराजगी व्यक्त कर जांच कराये जाने की मांग को देखते हुए पालिका ने कंपनी को सेवा विस्तार नहीं देने का मन बना लिया है। ये कंपनी मार्च तक कार्य करेगी, इससे पहले ही पालिका प्रशासन इस कार्य के लिए नई कंपनी की तलाश में जुट गई है। इसके लिए जल्द ही निविदा आमंत्रित करने के लिए बोर्ड ने भी अपनी सहमति व्यक्त कर दी है।

नगरपालिका परिषद् के द्वारा शहरी क्षेत्र को स्वच्छ बनाये रखने और घर-घर से कूड़ा उठान तथा शहर से निकलने वाले कूड़े का उचित निस्तारण करने के लिए प्राइवेट क्षेत्र की कंपनी को हायर किया था। इसके लिए दिल्ली की कंपनी एमआईटूसी को टैण्डर मिला और कंपनी ने 92 लाख रुपये प्रतिमाह के भुगतान पर 16 फरवरी 2024 से कार्य प्रारम्भ कर दिया था। कंपनी का 14 माह का अनुबंध पालिका ने किया है। इस अवधि में कंपनी को शहरी क्षेत्र से यूजर चार्ज कलेक्ट कर पालिका को जमा करना था, लेकिन इस दौरान कंपनी काफी विवादों में घिरी रही और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया गया। इसी को देखते हुए पालिका ने इस कंपनी के साथ काम करने से अब परहेज कर चुकी है। आज हुई पालिका बोर्ड मीटिंग में भी सभासद अन्नू कुरैशी, योगेश मित्तल, नौशाद खान, राजीव शर्मा, मनोज वर्मा, बबीता वर्मा सहित 40 से अधिक सभासदों ने कंपनी पर अनेक प्रकार के आरोप लगाने और शहरी क्षेत्र से यूजर चार्ज के रूप में प्रतिमाह मोटा भुगतान पाने के बावजूद भी पालिका को जमा नहीं कराकर भ्रष्टाचार करने, कर्मचारियों का वेतन और पीएफ नहीं देने के आरोपों के साथ ही कंपनी की जमानत राशि को जब्त करने और दस माह में वसूले गये यूजर चार्ज की जांच कराने की मांग करते हुए कंपनी को ब्लेकलिस्ट करने और कंपनी के खिलाफ अनियमिताओं को लेकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई है।

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पालिका ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने सदन को अवगत कराया कि पूर्व में कंपनी एमआईटूसी पर लगे सभी प्रकार के आरोपों की जांच के लिए जेई जलकल जितेन्द्र कुमार के नेतृत्व में कमेटी गठित की थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल कुमार को सौंपी थी। उन्होंने रिपोर्ट उपलब्ध करा दी है, जिसमें कई शिकायतों पर और अनुबंध की शर्त पूर्ण नहीं किये जाने में कंपनी को दोषी बताया गया है। कंपनी के खिलाफ कार्यवाही करने और कंपनी के साथ अनुबंध समाप्त करने की संस्तुति के साथ रिपोर्ट चेयरपर्सन को प्रेषित की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि चेयरपर्सन ने डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए एमआईटूसी को सेवा विस्तार देने से इंकार किया है, इसी क्रम में पालिका द्वारा कंपनी से अनुबंध समाप्त होने से पहले ही नई कंपनी की तलाश के लिए टैण्डर आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक साल के लिए कंपनी को पालिका 11 करोड़ 04 लाख रुपये के भुगतान पर कार्य करने के लिए आमंत्रित कर रही है। एमआईटूसी की जमानत राशि पालिका के पास बंधक है, जो कर्मचारी हित में जब्त भी की जा सकती है। इस पर निर्णय के लिए चेयरपर्सन से वार्ता की जायेगी।

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पालिका से गायब हो रही चेयरपर्सन की चिट्ठियां, जलकल में दो जेई में घमासान

मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् में चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के आदेशों के अनुपालन में लापरवाही सामने आती रही है। आज बोर्ड मीटिंग में सभासदों ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि उनके द्वारा दिये गये जनहित के मामलों के पत्र तो यहां से गायब होते ही रहते हैं, अब यहां पर चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप द्वारा जारी किये जाने वाले पत्रों को भी गायब किया जा रहा है। यहां तक की नगरपालिका कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या द्वारा भेजे गये पत्र को तो मुख्य कार्यालय में रिसीव तक नहीं किया गया है और वापस लौटा दिया गया। इस स्थिति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सभासद राजीव शर्मा, रजत धीमान आदि ने चेयरपर्सन और ईओ के समक्ष ही गंभीरता के साथ कदम उठाने और पत्रों को गायब करने के मामले में जांच कर ऐसे अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है।

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इसके साथ ही सभासदों ने जलकल विभाग में कार्यरत जेई जितेन्द्र कुमार और जेई धर्मवीर सिंह के बीच कार्य विभाजन को लेकर चल रही खींचतान को शहरी विकास में बाधा बताते हुए कहा कि चेयरपर्सन के आदेश को भी अनदेखा किया जा रहा है। चेयरपर्सन ने जेई जितेन्द्र कुमार को पथ प्रकाश विभाग में प्रभार देकर जलकल विभाग के कार्यों के दायित्व नहीं सौंपे हैं, ये कार्य धर्मवीर सिंह द्वारा किये जा रहे थे, लेकिन एई सुनील कुमार ने अपनी मर्जी से जितेन्द्र कुमार को ही सारे कार्य सौंप दिये, जो चेयरपर्सन के आदेशों का उल्लंघन है। उन्होंने इस मामले में भी जांच कराये जाने की मांग करते हुए जेई धर्मवीर और जेई जितेन्द्र के बीच जलकल विभाग के कार्य विभाजित करते हुए दायित्व तय करने की मांग की। ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि इस पर एई जलकल से कार्य विभाजन की रिपोर्ट मांगी गई है। उसके अनुसार ही कार्य कराया जायेगा। 

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