सात मेडिकल एजेंसियों पर छापे, नकली दवाइयों के धंधे से मचा हड़कंप

मुजफ्फरनगर। आगरा में नकली दवाइयों का बड़ा जाल पकड़े जाने के बाद पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दवा कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है। इसी कड़ी में सहायक आयुक्त औषधि सहारनपुर मंडल के निर्देशन पर मुजफ्फरनगर जिले की सात मेडिकल एजेंसियों पर औषधि विभाग की टीम ने छापेमारी कर औषधियों के रिकॉर्ड की गहन जांच की। कार्रवाई के दौरान कई संदिग्ध दवाओं के नमूने भी जांच हेतु संग्रहित किए गए।
आगरा में 24 अगस्त को हुई कार्यवाही के दौरान ढाई करोड़ की नकली दवाइयों के भंडाफोड़ के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। सहायक आयुक्त औषधि सहारनपुर मंडल, श्रीमती दीपा लाल के निर्देशन में गठित टीम ने मुजफ्फरनगर में अभियान चलाया। टीम में सहारनपुर के औषधि निरीक्षक राघवेंद्र और मुजफ्फरनगर के औषधि निरीक्षक पवन कुमार शाक्य शामिल रहे। टीम ने आनंद मेडिकल एजेंसी, वल्लभ मेडिकल एजेंसी और आयुष मेडिकोज पर छापेमारी की। इस दौरान औषधियों के क्रय-विक्रय अभिलेखों की बारीकी से जांच की गई और संदिग्ध पाए जाने पर छह दवाओं के नमूने जांच के लिए संग्रहित किए गए। इसके अलावा श्रीजी मेडिकल एजेंसी, अल्ट्रा मेडिकल एजेंसी, एस.आर. मेडिकल एजेंसी और दिल्ली मेडिकल एजेंसी के भी रिकॉर्ड खंगाले गए।
ज्ञात हो कि आगरा के हेमा मेडिको एजेंसी पर हाल ही में एसटीएफ और औषधि विभाग ने संयुक्त छापा मारा था। यहां से करीब ढाई करोड़ की नकली दवाइयां बरामद हुई थीं। जांच में सामने आया कि एजेंसी मालिक हिमांशु अग्रवाल ने पकड़े जाने से बचने के लिए एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने की कोशिश की थी, और बाद में रकम बढ़ाकर दो करोड़ रुपये की पेशकश की थी। औषधि विभाग की इस कार्रवाई के बाद दवा कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जांच का दायरा आगे और बढ़ाया जाएगा तथा नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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