मनरेगा नामकरण से लेकर सनातन धर्म, राम नाम और योगीराज तककृकी राजनीति, संस्कृति और विकास पर खुलकर रखे विचार
मुजफ्फरनगर। देश की समकालीन राजनीति, सांस्कृतिक विमर्श और सनातन धर्म की भूमिका को लेकर जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी डॉ. उमाकान्तानंद सरस्वती जी महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने विपक्षी दलों की भाषा शैली और बयानबाजी को भारतीय सांस्कृतिक नैतिकता के विपरीत बताते हुए इसे मर्यादाहीन करार दिया। साथ ही, उन्होंने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए भविष्य की राजनीति पर भी अपने विचार रखे।
दिल्ली से हरिद्वार जाते समय जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी डॉ. उमाकान्तानंद सरस्वती जी महाराज का हाईवे स्थित एक रिजोर्ट पर स्वागत किया गया। यहां पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. उमाकान्तानंद महाराज ने देश में चल रही राजनीति में विपक्षी दलों की भूमिका को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं की भाषा शैली न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि वह भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से कोसों दूर है। स्वामी जी ने मनरेगा योजना के नाम परिवर्तन और उससे जुड़े विवादों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा हराम में भी राम, जैसे शब्दों के प्रयोग पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि राम इस सृष्टि का आधार हैं। सनातन धर्म राम के बिना अधूरा है। ‘हराम न तो संस्कृत का शब्द है, न संस्कृति का और न ही हिंदी का। यह उर्दू शब्दावली से आया है, जिसे राम नाम के साथ जोड़ना पूरी तरह गलत है। उन्होंने विपक्ष को अपनी जुबान संभालने की नसीहत दी।
महामंडलेश्वर ने कहा कि सत्ता में परिवर्तन के साथ नामकरण की राजनीति हमेशा से होती रही है। हर सरकार ने अपने समय में नाम बदले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक सनातन धर्म को दबाने और कुचलने का प्रयास किया गया। जिन लोगों ने सनातन को सताया, उनके नाम पर देश में कुछ भी नहीं होना चाहिए। भारत में मुगलों की कोई निशानी नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को नष्ट किया। स्वामी उमाकान्तानंद सरस्वती ने अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर को सनातन शक्ति की वापसी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि काशी और मथुरा के लिए आवाज उठना स्वाभाविक है। देश में जहां-जहां धर्म का विनाश किया गया, वहां खुदाई होनी चाहिए। वहां ईश्वर मिलेगा और ईश्वर के मिलने से सनातन धर्म का परचम लहराएगा।
हिंदू-मुस्लिम राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग इस मुद्दे पर सवाल उठाते हैं, उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। सपा और कांग्रेस ने हमेशा मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति की है। अगर आज कोई दल हिंदुत्व और सनातन धर्म की बात करता है, तो इसमें गलत क्या है? उन्होंने भाजपा की सबका साथ, सबका विकास नीति की सराहना करते हुए कहा कि इसी नीति के चलते पार्टी ने जनता का विश्वास जीता है। देश के विभाजन का उल्लेख करते हुए स्वामी जी ने कहा कि जब बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ और मुसलमानों को उनका अलग राष्ट्र मिल गया, तो भारत को सेकुलर कहने की जरूरत क्यों पड़ी। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह शुरू से ही हिंदू राष्ट्र रहा है। जरूरत है तो हिंदुओं को हिंदू होने की। उन्होंने समान नागरिक संहिता को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि आज भी हिंदू बहुसंख्यक होने के बावजूद दबा हुआ महसूस करता है। अंत में उन्होंने हिंदू समाज से आह्वान किया कि वह अध्यात्म की ओर लौटे और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पहचाने, तभी सनातन धर्म और राष्ट्र दोनों सशक्त बनेंगे। इस दौरान महामनीषी निरंजन स्वामी महाराज और कथावाचक साध्वी विष्णु प्रिया के अलावा सचिन त्यागी एवं सुनील जैन भी मौजूद रहे।
यूपी में फिर लहरायेगा भाजपा का भगवा ध्वज
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश की राजनीति और 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर स्वामी उमाकान्तानंद सरस्वती ने विश्वास जताया कि प्रदेश की जनता एक बार फिर भाजपा को सत्ता सौंपेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद को साबित करके दिखाया है। उनके सामने कोई दूसरा टिक नहीं पा रहा। यदि उन्हें प्रधानमंत्री बनाया जाता है तो यह अच्छी बात होगी, लेकिन राजनीति के अखाड़े में कब कौन सा मोहरा चित्त हो जाए, कहा नहीं जा सकता।
स्वामी जी ने कहा कि योगीराज में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है। जो राज्य कभी गुंडागर्दी का पर्याय था, आज विकास के पथ पर अग्रसर है। कानून व्यवस्था ने लोगों का दिल जीता है, माफियाओं का विनाश हुआ है और जनता का विश्वास कायम हुआ है। सड़क, निवेश, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में बड़े काम हुए हैं, जीवन स्तर सुधरा है और जीडीपी में वृद्धि हुई हैकृयही वास्तविक विकास है।





