श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई । भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग आज अपना जवाब अदालत में दाखिल करेगा। इसके बाद रिपोर्ट पर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो सकती है। वर्तमान में हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष की 18 याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इन याचिकाओं में शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने और भूमि पर कब्जा देने की मांग की गई है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह मामला में एएसआई की भूमिका
इससे पहले 30 जनवरी को जस्टिस अविनाश सक्सेना की अदालत में करीब तीन घंटे तक सुनवाई चली थी। उस दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा था। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई 20 फरवरी के लिए तय की थी।
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकार एवं अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने अदालत को बताया था कि मुकदमा संख्या तीन में अब तक एएसआई की रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है। इस पर विभाग ने कहा था कि रिपोर्ट और जवाब प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय आवश्यक है।
मस्जिद पक्ष की आपत्ति और आवेदन
मस्जिद पक्ष ने 22 अगस्त को सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत आवेदन दायर किया था। इस आवेदन में समेकित मुकदमों की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई है। अदालत इस आवेदन पर भी विचार कर सकती है।
हिंदू पक्ष का दावा
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मस्जिद का निर्माण 17वीं सदी में औरंगजेब के शासनकाल में हुआ।
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दावा है कि प्राचीन केशवदेव मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई।
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स्थल को भगवान कृष्ण का जन्मस्थान बताया जाता है।
मुस्लिम पक्ष का पक्ष
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मस्जिद की ऐतिहासिक और कानूनी वैधता का दावा।
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भूमि स्वामित्व और अधिकार को लेकर आपत्ति।
इस विवाद में मंदिर की जमीन पर स्वामित्व, पूजा का अधिकार और स्थल की पुरातात्विक जांच जैसे मुद्दे शामिल हैं। फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में 18 से अधिक याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें दोनों पक्ष अपने-अपने दावे अदालत के समक्ष रख रहे






