यूपी ट्रैफिक नियम अध्यादेश को मंजूरी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश में यातायात नियम तोड़ने वालों पर सख्ती और बढ़ने जा रही है। अब बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के चालान और मुकदमे समय बीतने पर स्वतः समाप्त नहीं होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस संशोधन प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। राज्य सरकार का कहना है कि यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के 20 नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में किया गया है।
राज्यपाल की औपचारिक मंजूरी मिलते ही यह अध्यादेश पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगा। गृह विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अब तक 1979 की पुरानी व्यवस्था लागू थी। इस व्यवस्था के तहत मोटर वाहन अधिनियम के उल्लंघन के मामलों में अगर कोई व्यक्ति जुर्माना नहीं भरता था, तो एक तय समयावधि के बाद लोक अदालत के जरिए ऐसे मामले स्वतः समाप्त हो जाते थे। सरकार का मानना है कि बहुत से वाहन चालक इस ढील का फायदा उठाते थे। वे जानबूझकर चालान नहीं भरते थे और समय बीतने का इंतजार करते थे।
योगी कैबिनेट ने अब अधिनियम की धारा-9 में संशोधन कर इस रियायत को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसके बाद ट्रैफिक नियमों के गंभीर उल्लंघन से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई सिर्फ समय बीत जाने से खत्म नहीं होगी। सरकार ने जिस प्रस्ताव को मंजूरी दी है, उसका नाम ‘उप्र दंड विधि (अपराधों का शमन और निवारणों का उपशमन) (संशोधन) अध्यादेश-2026’ है। संशोधित कानून के अनुसार, तीन तरह की स्थितियों में लंबित चालान या मुकदमे बंद नहीं होंगे।
यदि कोई वाहन चालक बार-बार एक ही तरह का या अलग-अलग ट्रैफिक नियम तोड़ता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ पिछली सभी कार्रवाइयां लंबित रहेंगी। ऐसे गंभीर उल्लंघन, जिनमें कानूनन जेल की सजा का प्रावधान अनिवार्य है, उन्हें समय सीमा के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकेगा। वे मामले, जिनमें मौके पर जुर्माना भरकर या समझौता कर मामला खत्म नहीं किया जा सकता, वे आगे भी अदालती प्रक्रिया के अधीन रहेंगे। सरकार का मानना है कि इस कड़े प्रावधान से उन वाहन चालकों में डर पैदा होगा, जो नियमों को हल्के में लेते हैं। अब सिर्फ चालान लंबित छोड़ देने से मामला अपने-आप खत्म नहीं होगा।
इसके साथ ही लंबित चालान होने पर वाहन की फिटनेस, एनओसी और अन्य विभागीय कामों में भी दिक्कत आ सकती है। यानी नियम तोड़ने के बाद जुर्माना टालना अब आगे और महंगा पड़ सकता है। गृह विभाग के अनुसार, इस कानून का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और लोगों को यातायात नियमों के प्रति अधिक अनुशासित बनाना है।
सरकार चाहती है कि वाहन चालक नियमों को औपचारिकता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के तौर पर लें। स्पष्ट है कि अब उत्तर प्रदेश में ट्रैफिक नियम तोड़ने के बाद समय बीतने का इंतजार करना राहत का रास्ता नहीं रहेगा। नए अध्यादेश के लागू होने के बाद उल्लंघनकर्ताओं को कानून के दायरे में आना ही होगा।





