बंगाल भाजपा संकल्प पत्र जारी करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल में बड़े राजनीतिक बदलाव और ‘सोनार बांग्ला’ बनाने का वादा किया। 2026 विधानसभा चुनाव से पहले जारी इस संकल्प पत्र में लड़कियों की केजी से पीजी तक मुफ्त पढ़ाई, सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत आरक्षण, हर महिला के बैंक खाते में 3,000 रुपये और सरकार बनने के छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता लागू करने जैसे बड़े वादे किए गए हैं।
अमित शाह ने संकल्प पत्र को भाजपा की चुनावी रणनीति का अहम दस्तावेज बताते हुए कहा कि बंगाल की जनता अब तुष्टिकरण, तानाशाही और वसूली की राजनीति से तंग आ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता पारदर्शी और विकासोन्मुखी सरकार चाहती है। संकल्प पत्र में महिलाओं पर खास जोर दिया गया है। इसके तहत लड़कियों के लिए केजी से पीजी तक की पढ़ाई मुफ्त करने का वादा किया गया है। इसके अलावा सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात भी कही गई है।
भाजपा ने यह भी कहा है कि बंगाल में उसकी सरकार बनने पर हर महिला के बैंक खाते में 3,000 रुपये दिए जाएंगे। भाजपा ने यह भी वादा किया है कि सरकार बनने के छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। संकल्प पत्र में एम्स और एक फैशन टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट बनाने की घोषणा भी शामिल है। अमित शाह ने कहा कि चावल, आलू और आम की खेती करने वाले किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए विशेष योजना शुरू की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आलू, चावल और आम उत्पादकों को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। संकल्प पत्र जारी करने के बाद अमित शाह ने कहा, “आज भारतीय जनता पार्टी ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया है। यह घोषणापत्र बंगाल के सभी वर्गों में फैली गहरी निराशा को दूर करने का एक मार्ग दिखाता है।” उन्होंने कहा, “यह फसल खराब होने के कारण अनिश्चितता का सामना कर रहे किसानों, बेरोजगार युवाओं और डर के साए में जी रही महिलाओं को एक नई दिशा प्रदान करता है। साथ ही, यह बंगाल की संस्कृति और उसके गौरव को लेकर चिंतित हर नागरिक में नई आशा और आत्मविश्वास जगाता है।” अमित शाह ने कहा कि ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना इस संकल्प पत्र में झलकती है।
उन्होंने पिछले 15 वर्ष को बंगाल और यहां की जनता के लिए अंधकारमय दौर जैसा बताया। शाह ने कहा कि बंगाल की जनता ने बड़ी उम्मीदों के साथ ममता दीदी को कम्युनिस्ट शासन से मुक्ति दिलाने का जनादेश दिया था। उनके मुताबिक, जनता ने एक बार नहीं, बल्कि दूसरी और तीसरी बार भी जनादेश दिया, लेकिन जिन उम्मीदों के साथ सत्ता सौंपी गई थी, वे पूरी नहीं हो पाईं। उन्होंने कहा, “पिछले 15 वर्षों में, जिन उम्मीदों के साथ बंगाल की जनता ने ममता जी को सत्ता सौंपी थी, वे टूट चुकी हैं।
आज जनता भयभीत और निराश महसूस कर रही है और पूरे दिल से बदलाव की तलाश में है।” अमित शाह ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भाजपा ने बंगाल में खुद को एक रचनात्मक विपक्ष के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि आज भाजपा पश्चिम Bengal विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में काम कर रही है। शाह ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान पूरे देश में यह उदाहरण पेश किया गया है कि किस प्रकार जन-केंद्रित शासन दिया जा सकता है।
भाजपा का यह संकल्प पत्र सिर्फ चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के संदेश के रूप में भी पेश किया गया है। महिलाओं, किसानों, युवाओं और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों पर जोर देकर पार्टी ने 2026 के चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक दिशा साफ कर दी है। इस दस्तावेज के जरिए भाजपा ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह बंगाल में विकास, कल्याणकारी योजनाओं और वैचारिक मुद्दों को एक साथ लेकर चुनावी मैदान में उतरने जा रही है।






