अमेरिकी डील के खिलाफ भाकियू की पंचायत, जुटेंगे चार जिलों के किसान

एमएसपी गारंटी कानून, गन्ना भुगतान और बिजली दरों पर किसानों की आवाज उठाने को शामिल होंगे राकेश टिकैत

मुजफ्फरनगर। 22 फरवरी को भारतीय किसान यूनियन के द्वारा किसान-मजदूर महापंचायत आयोजित की जा रही है। इस पंचायत में किसानों और मजदूरों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। इस महापंचायत में मुख्य अतिथि के रूप में भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत की उपस्थिति रहेगी, जहां न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी, गन्ना भुगतान, बिजली दरों और भारत-अमेरिका कृषि समझौते के संभावित प्रभावों पर आवाज बुलंद की जाएगी।
भाकियू जिलाध्यक्ष नवीन राठी ने बताया कि भारत अमेरिकी डील की सच्चाई किसानों तक पहुंचाने और किसानों से जुड़े मद्दों को उठाने के लिए यूनियन के शीर्ष नेतृत्व के द्वारा बागपत-मुजफ्फरनगर के सीमावर्ती गांव सरोरा-नगवा कुटी में 22 फरवरी को एक बड़ी महापंचायत बुलाई गई है। इसमें चार जिलों मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत और मेरठ के किसान हिस्से लेंगे। यह आंदोलन किसान और मजदूर के अधिकारों तथा अस्तित्व की रक्षा की लड़ाई है। लंबे समय से लंबित गन्ना भुगतान, बढ़ती बिजली दरें और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाएगी। जब तक एमएसपी को कानून का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित नहीं हो सकेगा।
भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने अपने हालिया बयान में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कोई डील नहीं, बल्कि डिक्लरेशन है। उनके अनुसार यह घोषणा केंद्र सरकार द्वारा एकतरफा रूप से की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के समझौते देश के कृषि क्षेत्र पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं और इस पर व्यापक राष्ट्रीय बहस की आवश्यकता है। टिकैत ने कहा कि अमेरिका के साथ हुई इस घोषणा का विरोध जारी रहेगा और इस विषय पर पंचायतें व बैठकें निरंतर आयोजित की जाएंगी। उन्होंने इसे वर्तमान समय का सबसे बड़ा प्रश्न बताते हुए किसानों से सजग रहने की अपील की।
उन्होंने समाज से आह्वान किया कि सरकार से मिलने वाले लाभ को लेने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, लेकिन संघर्ष के समय एकजुट रहना अनिवार्य है। उनका कहना था कि यदि समाज संगठित रहेगा तो ही अपने अधिकारों की रक्षा कर सकेगा। सरकार पर समाज को विभाजित करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि इस सरकार का इलाज ये ही समाज करेगा। बागपत बॉर्डर पर प्रस्तावित इस महापंचायत को लेकर क्षेत्र में तैयारियां तेज हो गई हैं। आसपास के जिलों से किसानों और मजदूर संगठनों के बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना है। इसके लिए गांव गांव मीटिंग का दौर चल रहा है।

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