ऐतिहासिक फैसलाः अधिवक्ता समीर हत्याकांड में तीन दोषियों को फांसी

साढ़े छह साल पहले 45 लाख रुपये के विवाद में अपहरण के बाद की गई थी युवा अधिवक्ता की हत्या, न्यायाधीश ने फैसले में कविता लिखकर जताई संवेदना

मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में बहुचर्चित समीर सैफी अपहरण एवं हत्या प्रकरण में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक अन्य को सात वर्ष की सजा सुनाई है। आर्थिक विवाद से उपजे इस अपराध ने न केवल शहर को झकझोरा, बल्कि न्यायालय के फैसले ने भी इसे एक मिसाल के रूप में स्थापित कर दिया है।

मुजफ्फरनगर के चर्चित अधिवक्ता समीर सैफी अपहरण और हत्या मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने तीन मुख्य दोषियोंकृसोनू उर्फ रिजवान, सिंगोल अल्वी और शालू उर्फ अरबाजकृ को फांसी की सजा सुनाई, जबकि चौथे आरोपी दिनेश को साक्ष्य मिटाने के अपराध में सात वर्ष के कारावास से दंडित किया गया। साथ ही दोषियों पर 10 लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया। दिनेश समीर के सीकरी गांव में स्थित मुर्गी फार्म पर नौकर था, जिसने लाश छिपाने में आरोपियों की मदद की।

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यह मामला वर्ष 2019 का है, जब 15 अक्टूबर की शाम समीर सैफी संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। चार दिन बाद 19 अक्टूबर को उनका शव भोपा क्षेत्र के सीकरी गांव में बरामद हुआ। पुलिस जांच में सामने आया कि यह घटना 45 लाख रुपये के लेन-देन के विवाद का परिणाम थी। जांच के अनुसार, आरोपियों ने पहले समीर का अपहरण किया और फिर उन्हें कार में बैठाकर सीकरी स्थित एक फार्महाउस ले जाया गया, जहां गला घोंटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को मिट्टी में दबाकर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया।

मामले में वादी अजहर की शिकायत पर पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ अपहरण, हत्या, साजिश और साक्ष्य नष्ट करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन पक्ष ने अदालत में छह गवाह प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर शनिवार को सभी आरोपियों को दोषी करार दिया गया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने यह तर्क रखा कि मृतक पेशे से अधिवक्ता नहीं था और निजी व्यापार से जुड़ा हुआ था। इसके जवाब में अभियोजन ने स्पष्ट किया कि समीर ने हाल ही में बार काउंसिल में पंजीकरण कराया था और घटना के दिन ही उन्होंने कचहरी में अपना चौंबर शुरू किया था। अदालत ने अपने निर्णय में उल्लेख किया कि तीनों मुख्य आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने की साजिश रची, जबकि दिनेश की भूमिका साक्ष्य नष्ट करने तक सीमित पाई गई।

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शहर कोतवाली पुलिस ने रिजवान, सिंगोल अल्वी व अरबाज के खिलाफ धारा 364, 302, 201 व 120 बी व आरोपी दिनेश के खिलाफ धारा 201 में चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (नंबर 3) के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर के समक्ष हुई। अभियोजन की ओर से पैरवी करने वाले सहायक शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार एवं वादी की ओर से पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल जिंदल के अनुसार कोर्ट ने शनिवार को मामले में निर्णय करते हुए चारों आरोपियों को दोषी करार दिया था और सोमवार को सजा पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद न्यायालय द्वारा अपना फैसला सुनाया गया, जो ऐतिहासिक रहा।

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फैसले की एक खास बात यह रही कि न्यायाधीश ने अपने निर्णय में एक कविता भी शामिल की, जिसकी शुरुआती पंक्तियांकृ “कचहरी की सीढ़ियों पर, आज सन्नाटा कुछ बोल रहा है” कृ न्यायिक संवेदनशीलता को दर्शाती हैं। यह कविता भी फैसले के साथ चर्चा का विषय बनी रही। घटना के बाद से एक आरोपी सिंगोल अल्वी पहले ही जेल में बंद था, जबकि अन्य को दोष सिद्ध होने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। सजा सुनाए जाने के दौरान सभी चारों दोषी अदालत में मौजूद रहे। पीड़ित पिता ने अदालत के इस निर्णय पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे न्याय की जीत और समाज के लिए एक नजीर बताया है।

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