पालिका बनायेगी अपनी गौशाला, स्मार्ट शहर बनेगा मुजफ्फरनगर

मुजफ्फरनगर। अपना शहर में जल्द ही स्मार्ट सिटी के रूप में निखरता नजर आएगा, इसके लिए शासन की योजना पर पालिका प्रशासन ने एक बड़ी कार्ययोजना बनाने के लिए कवायद की है। इसमें शासन द्वारा तय किये गये 24 बिन्दुओं पर विकास की संभावनाओं को तलाशने के लिए नगर विकास विभाग ने प्रस्ताव मांगे हैं, जिनकी जमीनी हकीकत को परखने के लिए स्थानीय निकाय निदेशालय लखनऊ के अपर निदेशक ने मुख्यालय पहुंचकर समीक्षा बैठक करने के साथ ही स्थलीय निरीक्षण किया। कांवड़ की तैयारियों को देखा और वृक्षारोपण करते हुए पर्यावरण संरक्षण में हरित शहर के संकल्प की पूर्ति के लिए दिशा निर्देश दिये।

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की बड़ी नगरपालिका परिषद्ों को भी अब स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए नगर विकास विभाग की ओर से चिन्हित निकायों में गेप एनालेसिस के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को भेजकर विकास की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को स्थानीय निकाय निदेशालय के अपर निदेशक डॉ. असलम अंसारी ने नगरपालिका परिषद् मुख्यालय टाउनहाल पहुंचकर अधिशासी अधिकारी कार्यालय में बिन्दूवार समीक्षा की। इसमें उन्होंने शहर में अपनी गौशाला, स्मार्ट एवं डिजीटल रिकॉर्ड रूम, स्मार्ट रोड, स्मार्ट पार्क, मल्टीलेवल पार्किंग, ऑडिटोरियम, प्रदर्शनी केन्द्र, महिलाओं के लिए सी-लॉन्ज, साइनेज बोर्ड, पथ प्रकाश, पेयजलापूर्ति और स्वच्छता कार्य को लेकर बिन्दूवारी समीक्षा करते हुए पालिका के विकास कार्यों को भी परखने का काम किया। साथ ही पालिका के नये भवन के निर्माण के लिए आवश्यकता को भी समझने का प्रयास किया। यहां पालिका को अपनी गौशाला बनाने के लिए भी कहा गया, जिस पर ईओ ने कान्हा गौशाला योजना में स्वीकृति पाने के लिए की गई कार्यवाही की जानकारी दी और बताया कि शासन ने सीएनडीएस को इसकी धनराशि जारी की थी, लेकिन काम नहीं हुआ, अब पालिका ने यह पैसा वापस मांगा है। जल्द ही जनकपुरी स्थित पालिका की भूमि पर गौशाला बनाने का काम करायेंगे। अभी पालिका नवीन मंडी स्थल पर नंदी गौशाला एवं ट्रीटमेंट सेंटर ही चला रही है, जिसमें 50 पशु रखने की क्षमता है।

अपर निदेशक के समक्ष ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने पालिका के द्वारा कराये गये कुछ प्रमुख कार्यों के साथ ही प्रस्तावित विकास योजना को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि स्मार्ट पार्क के रूप में पालिका मुख्यमंत्री नगरोदय योजना में कमला नेहरू वाटिका को एक थीम पार्क के रूप में विकसित करने जा रही है। इसके लिए शासन से सीएनडीएस जल निगम को 3.33 करोड़ रुपये का बजट मिला है। इसके साथ ही पौराणिक एवं ऐतिहासिक धरोधर के रूप में मोती झील को विकसित किया जा रहा है। शहरी सौन्दर्यकरण में चाट बाजार और अस्पताल पर बंद कूड़ा डलावघर की कार्ययोजना को प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि यहां सेल्फी प्वाइंट और अन्य कार्य पर 90 लाख खर्च करने का प्लान है।

ईओ डॉ. सिंह ने बताया कि अभी तक केवल निगमों को ही स्मार्ट सिटी योजना से आच्छादित किया गया है, लेकिन अब प्रदेश सरकार ने कुछ बड़ी पालिकाओं को भी स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है, इसके लिए गेप एनालेसिस कराया जा रहा है। इसमें विकास के लिए 24 बिन्दू निर्धारित किये गये हैं, जिन पर आज अपन निदेशक स्थानीय निकाय निदेशालय लखनऊ डॉ. असलम अंसारी ने मुख्यालय पहुंचकर समीक्षा करते हुए शहरी विकास और आवश्यकताओं की संभावनाओं को परखने का काम किया।

इसके लिए 13 जुलाई तक पालिका स्तर से प्रस्ताव बनाकर निदेशालय को भेजने के निर्देश दिये गये हैं। इसमें सम्बंधित अधिकारियों को विस्तृत कार्ययोजना के साथ प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दे दिये गये हैं। अपर निदेशक ने पालिका अधिकारियों के साथ टाउनहाल स्थित पार्क में वृक्षारोपण भी किया और समीक्षा बैठक के बाद उन्होंने कांवड़ मार्ग मदीना चौक से मीनाक्षी चौक का निरीक्षण किया। शिव चौक पहुंचकर व्यवस्था परखी और कांवड़ के दौरान शासन के दिशा निर्देशों के अनुसार व्यवस्था पर जोर दिया। कमला नेहरू वाटिका का भ्रमण करते हुए वहां थीम पार्क प्रोजेक्ट की जानकारी ली। समीक्षा बैठक में ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह के अलावा एई जल सुनील कुमार, एई निर्माण नैपाल सिंह, एएसए डॉ. अजय प्रताप शाही, जेई निर्माण कपिल कुमार, राजीव सोनकर, जेई जल जितेन्द्र सैनी, सीएसएफआई योगेश गोलियान, एसएफआई प्लाक्षा मैनवाल, वैशाली सोती, डीपीएम एसबीएम सुशील कुमार, आईटी प्रियेश कुमार, लिपिक एसबीएम आकाशदीप, लिपिक संपत्ति शोभित कुमार आदि मौजूद रहे।

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अपर निदेशक ने पढ़ाया कर्तव्य का पाठ, कहा-अपने एक्ट को ताकत बनाओ

मुजफ्फरनगर। शहर को स्मार्ट सिटी बनाये जाने की शासन की योजना पर विकास की संभावनाओं को तलाशने के लिए मुख्यालय पहुंचे अपर निदेशक स्थानीय निकाय डॉ. असलम अंसारी ने पालिका के अधिकारियों को उनके अधिकार और कर्तव्य को याद दिलाने में भी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी।अधिकारियों और संसाधन की कमी की बात सामने आने पर अपर निदेशक ने कहा कि संसाधन की कमी नहीं है, केवल इच्छाशक्ति कम हो रही है। उन्होंने अधिकारियों को पदीय दायित्व के साथ एक नागरिक जिम्मेदारी का निर्वहन करने की प्रेरणा देते हुए कहा गया कि सरकार ने आपको अधिकार दिए, एक शक्तिशाली एक्ट दिया है। इसका उपयोग करें और इसके सहारे मिली अपनी ताकत को पहचानें।

इस ताकत का जनहित में प्रयोग करें, जनता के बीच खुद को साबित करने के लिए अवकाश के दिन भी फील्ड में उतरें और सकारात्मक कार्यप्रणाली से जनविश्वास को जीतने का काम करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री का दौरा लगता है तो रातोंरात ही पूरा शहर चमक जाता है, ये कैसे होता है, हर रोज ऐसी ही इच्छाशक्ति और टीम वर्क के साथ कार्य करने की आवश्यकता है, ये हो जाये तो इसी संसाधन से हम शहर को स्वर्ग बना सकते हैं। कहा कि जब अधिकारी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ता है तो सरकार को मिशन लाना पड़ता है, जैसे स्वच्छ भारत मिशन लाया गया, मिशन की समयावधि तय होती है, इसके बाद करना हमें ही पड़ता है। मिशन में भी हम ही काम करते हैं, लेकिन तब जवाबदेही रहती है।

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