हाउस टैक्स की वसूली में निखरी पालिका, जलमूल्य में लक्ष्य से दूर

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् के राजस्व वसूली में पिछड़ने को लेकर गंभीर हुई अधिशासी अधिकारी के द्वारा कर विभाग के साथ ही अन्य सम्बंधित विभागों के पेंच कसने के बाद कर विभाग ने स्थिति साफ करते हुए दावा किया है कि कर की मद में राजस्व वसूली के लिए पालिका निखरी है, जबकि जलमूल्य और किराया पटल पर लापरवाही के कारण राजस्व की वसूली नहीं हो पाने से इनका लक्ष्य हासिल करना भी नामुमकिन हो रहा है। इसमें ईओ से यह वादा भी किया गया है कि कर की मद में पालिका लक्ष्य से 30 प्रतिशत ज्यादा राजस्व प्राप्त करेगी।

बता दें कि 04 मार्च को ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने नगरपालिका में टैक्स के रूप में राजस्व वसूली की समीक्षा की थी। इसमें लक्ष्य से पिछड़ने पर उन्होंने गंभीर चिंता जाहिर करते हुए दिशा निर्देश दिये थे। इसके बाद पालिका में पंजीकृत 82449 के सापेक्ष 33605 भवन संपत्तियों से ही टैक्स के रूप में राजस्व प्राप्त करने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कर निर्धारण अधिकारी दिनेश यादव को नोटिस जारी करते हुए दो दिन में जवाब तलब किया था। इस नोटिस पर कर निर्धारण अधिकारी ने अपना जवाब ईओ को भेज दिया है। उनका दावा है कि राजस्व वसूली में पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल पालिका रिकॉर्ड वसूली करने जा रही है।

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केएनए दिनेश यादव के अनुसार गतवर्ष 2023-24 के माह मार्च 2024 तक कर की मद में 531.73 लाख रुपये का राजस्व छूट सहित वसूल किया गया था, जबकि इस वर्ष 2024-25 मे कर की मद में 546.34 लाख रुपये की शु( वसूली व छूट सहित 628.12 लाख रुपये माह फरवरी 2025 तक वसूल किये गये हैं। जो गतवर्ष की माह मार्च 2024 तक की वसूली के सापेक्ष 118 प्रतिशत है, और यह वसूली मार्च 2025 के अन्त तक 125 प्रतिशत से अधिक हो जायेगी। कर विभाग में पंजीकृत 82449 संपत्तियों के सापेक्ष 33605 भवनों से ही वसूली चार मार्च तक हो पाई है, लगभग 41 प्रतिशत है। इस पर उनका कहना है कि गतवर्ष 2023-24 में 26811 भवनों से ही वसूली हुई थी, इसके दृष्टिगत विभाग ने इस स्तर पर भी ज्यादा संपत्तियों से वसूली की है और प्रयास जारी हैं। विज्ञापन की मद में गतवर्ष 2023-24 में 24.43 लाख के सापेक्ष वित्तीय वर्ष 2024-25 में 52.02 लाख का राजस्व वसूल किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबला दोगुणा से अधिक है और इसमें भी वृ(ि हुई है।

कर निर्धारण अधिकारी दिनेश यादव ने ईओ को भेजे जवाब में कुछ खामियों को भी सामने रखा है, जिसमें जलकल और किराया पटल पर राजस्व वसूली में हो रही लापरवाही को उन्होंने उजागर करते हुए यहां पर ध्यान देने की आवश्यकता जाहिर की है। केएनए श्री यादव के अनुसार जल मूल्य की वसूली गतवर्ष 2023-24 में 98.78 लाख थी, जो इस साल माह फरवरी 2025 तक 72.39 लाख है। जो गतवर्ष 2024-25 से कम है, माह मार्च 2025 तक भी इस वसूली में गतवर्ष के सापेक्ष 100 प्रतिशत की वसूली होना सम्भव प्रतीत नहीं हो रहा है, जल मूल्य की वसूली जलकल अभियन्ता द्वारा करायी जा रही है। किराये की वसूली गतवर्ष 2023-24 में माह मार्च 2024 तक 66.33 लाख थी, जो इस वर्ष 2024-25 में माह फरवरी 2025 तक 33.28 लाख है, ऐसे में करीब 33 लाख रुपये का राजस्व इस साल कम प्राप्त हुआ है। उन्होंने ईओ को आश्वस्त करते हुए कहा कि कर की मद में वो अपनी जिम्मेदारी निर्वहन कर रहे हैं और इस मद में वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक गत वर्ष के मुकाबले 30 प्रतिशत अधिक राजस्व प्राप्त कर पालिका के खजाने में पहुंचाया जायेगा।

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किराया मद में पत्रावलियों का निस्तारण न होने से लटका 22 लाख का राजस्व

मुजफ्फरनगर। कर निर्धारण अधिकारी दिनेश यादव का कहना है कि उनको केवल कर निर्धारण और सम्पत्ति नामांतरण का ही अधिकार पालिका में मिला हुआ है। कर वसूली का दायित्व ईओ के पास है। किराया मद का मामला भी वो ही देख रही हैं। इस मद में 23 पत्रावलियां लम्बित चल रही हैं, जिन पर ईओ को निर्णय लेना था, लेकिन समय से निर्णय नहीं होने के कारण इन पत्रावलियों को निस्तारित नहीं किया जा रहा है। इनका निस्तारण होता है तो 22 लाख रुपये का राजस्व पालिका प्राप्त करेगी। इसके साथ ही जलकल विभाग में राजस्व वसूली की कोई नीति बनाकर काम नहीं हो रहा है। जलकल अभियंता इसके लिए जिम्मेदार हैं। उनका कहना है कि किराया अत्याधिक विवाद होने के कारण भी राजस्व वसूली प्रभावित हो रही है। इसके लिए बनाये गये उप नियम तय होने के बाद इसमें बड़ा राजस्व मिलने की संभावना है। इसको लेकर ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह का कहना है कि उनको अवकाश होने के कारण केएनए की ओर से कोई जवाब अभी प्राप्त नहीं हुआ। किराया पत्रावलियों का निस्तारण धनराशि तय करने पर हो रहे विवाद के कारण नहीं हो पाया है। जलकल अभियंता को भी कम राजस्व वसूली के लिए पत्र जारी करते हुए व्यवस्था सुधारने के लिए चेतावनी दी गई है। हमारा प्रयास केवल पालिका में लक्ष्य के सापेक्ष राजस्व वसूली को 25 प्रतिशत या इससे अधिक पर ले जाना है ताकि पालिका को शासन से अतिरिक्त बजट दिलाने का काम हम कर पायें। 

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