MUZAFFARNAGAR-एमआईटूसी ने किया करोड़ों रुपये का घपला, कर्मियों ने खोला मोर्चा

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् के साथ काम कर रही दिल्ली की कंपनी एमआईटूसी के खिलाफ अब कर्मचारी पूरी तरह से उग्र हो गये हैं। तोड़फोड़ और हड़ताल के आरोप में निकाले गये कर्मियों के समर्थन में उतरे कंपनी के कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कर्मियों का पीएफ और वेतन रोकने के साथ ही यूजर चार्ज लेने के बाद भी कर्मियों पर बकाया बताते हुए कंपनी के लोगों ने करोड़ों रुपये का घोटाला किया है, जिसकी जांच होनी आवश्यक है। जो भी कंपनी के उत्पीड़न और घपलों के खिलाफ आवाज उठाता है, उसको ही नौकरी से निकाला जा रहा है। 13 कर्मियों को निकालने के साथ ही और लोगों को हटाने की चेतावनी दी जा रही है। ऐसे में कर्मियों ने कहा कि यदि उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो आंदोलन किया जायेगा।

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टाउनहाल परिसर में पालिका के सफाई कर्मचारी संघ के कार्यालय में गुरूवार को एमआईटूसी कंपनी के साथ काम कर रहे कर्मचारियों ने पत्रकार वार्ता के दौरान कंपनी पर उत्पीड़न करने और करोड़ों रुपये की हेराफेरी करने के आरोप लगाये हैं। यहां पर संघ के महामंत्री मिलन कुमार के साथ कंपनी में काम करने वाले जितेन्द्र वाल्मीकि, संदीप कुमार, राजेन्द्र कुमार, शुभम पारचा, संदीप और संजय कुमार आदि ने आरोप लगाया कि 15 फरवरी 2024 को पालिका प्रशासन के साथ अनुबंध के बाद एमआईटूसी कंपनी ने करीब 300 कर्मचारियों के साथ शहर में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन और डलाव घरों से कूड़ा उठान का कार्य शुरू किया था, लेकिन इस पूरे समय में अब तक भी कंपनी ने शर्तों के अनुसार काम नहीं किया है। कर्मचारियों को वेतन समय से नहीं दिया गया और पीएफ तथा ईएसआई में भी कंपनी ने कोई पैसा जमा नहीं किया है। इसके साथ ही अन्य सुविधा भी कर्मियों को नहीं मिल रही है।

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इसके लिए आवाज उठाने पर कंपनी के लोग कर्मचारियों को अपमानित करते हैं, नौकरी से निकालने और धमकी देने का काम किया जा रहा है, जो खुला उत्पीड़न और मानसिक व आर्थिक शोषण है। जितेन्द्र वाल्मीकि ने कहा कि ईएसआई की कटौती वेतन से की जा रही है, लेकिन पैसा जमा नहीं किया गया, जिस कारण कर्मचारियों को उपचार सुविधा नहीं मिल रही है। आज तक वर्दी नहीं दी गई। आवाज उठाने वाले कर्मियों को चिन्हित करते हुए नौकरी से हटाकर शोषण किया जा रहा है। आरोप लगाया कि जोन तीन के सुपरवाइजरों द्वारा यूजर चार्ज की जो राशि प्राप्त की गई, वो पैसा कंपनी के अधिकारियों के सामने कार्यालय पर जमा कराया गया, लेकिन इसके बावजूद भी इन सुपरवाइजरों पर पैसा बकाया दिखाकर इनका हिसाब नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि कंपनी के लोगों ने पीएफ, ईएसआई, वेतन और यूजर चार्ज आदि मदों में करोड़ों रुपये की हेराफेरी करते हुए वित्तीय अनियमितता की है। इसकी जांच के साथ ही कार्यवाही करने की मांग की गई है। 

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