सिंचाई विभाग की सड़कों में भ्रष्टाचार का आरोप, आरटीआई कार्यकर्ता की चौथे दिन भी भूख हड़ताल जारी
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में सिंचाई विभाग द्वारा नवनिर्मित सड़कों की गुणवत्ता पर उठे सवाल अब आंदोलन का रूप ले चुके हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता सुमित मलिक पिछले चार दिनों से जिलाधिकारी कार्यालय पर भूख हड़ताल पर डटे हैं। प्रशासनिक समझाइश और चिकित्सकीय जांच के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है।
जनपद में सिंचाई विभाग खंड गंगा नहर द्वारा निर्मित तीन सड़कों में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए आरटीआई कार्यकर्ता सुमित मलिक पीनना चार दिनों से जिलाधिकारी कार्यालय पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलन के चौथे दिन उनकी हालत बिगड़ने लगी, जिसके बाद प्रशासन द्वारा मेडिकल जांच कराई गई। जांच में उनका वजन करीब पांच किलो कम पाया गया, जबकि बीपी और शुगर का स्तर भी घटा हुआ मिला। सुमित मलिक का कहना है कि वर्ष 2025-26 में सिंचाई विभाग खंड गंगा नहर द्वारा बनाई गई सड़कों की हालत महज पांच दिन में ही खराब हो गई। सड़कों में न तो मानक के अनुसार तारकोल डाला गया और न ही निर्माण गुणवत्ता का ध्यान रखा गया। इस संबंध में 13 दिसंबर 2025 को जनपद के प्रभारी मंत्री को शिकायत की गई थी। जांच में भी सड़क निर्माण में अनियमितताएं सामने आईं, बावजूद इसके विभागीय अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के एक्सईएन की मिलीभगत से एसडीओ और जेई ने मिलकर घटिया सड़क निर्माण कराया। सीडीओ द्वारा की गई स्थलीय जांच में भी सड़क की गुणवत्ता खराब पाई गई। सुमित मलिक ने मांग की कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए, विभागीय जांच कराई जाए और सड़कों का दोबारा निर्माण कराया जाए, ताकि किसान अपने खेतों से शुगर मिल तक गन्ना आसानी से ले जा सकें। आरटीआई कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि एक जेई पिछले 12 वर्षों से एक ही जनपद में तैनात है, जो नियमों के खिलाफ है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने और कानूनी प्रक्रिया अपनाने की मांग की। सुमित मलिक का कहना है कि सिंचाई विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 में 35 सड़क टेंडर निकाले गए, जिनमें कमीशनखोरी के चलते बेहद कम दरों पर टेंडर स्वीकृत किए गए। इससे निर्माण गुणवत्ता प्रभावित हुई। उन्होंने इन सभी टेंडरों की जांच कराने और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई।
शनिवार देर शाम सिटी मजिस्ट्रेट पंकज राठौर ने धरना स्थल पर पहुंचकर सुमित मलिक से वार्ता की और भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया, लेकिन कार्रवाई के ठोस आश्वासन न मिलने पर आंदोलन जारी रहा। भूख हड़ताल के समर्थन में पर्यावरण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास दीक्षित, जितेंद्र कोच, हिमांशु चौधरी, अंकित मलिक पीनना, गौरव पवार, अंकित, अनुज सागर, हरेंद्र मलिक बिट्टू पीनना, सुबोध पवार और पुष्पेंद्र चौधरी सहित कई लोग धरना स्थल पर पहुंचे और समर्थन जताया।






