ईरान सऊदी एयर बेस हमला ने मध्य पूर्व में हालात और ज्यादा गंभीर कर दिए हैं। सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमले में कम से कम 10 अमेरिकी सैनिक घायल हो गए हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस हमले में कई ईंधन भरने वाले विमान भी तबाह हो गए हैं शुक्रवार को हुए इस हमले में ईरान ने सऊदी अरब स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाया। अधिकारियों के अनुसार, हमले में कई विमान क्षतिग्रस्त हुए और बेस को भारी नुकसान पहुंचा है।
दो अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर इस घटना की पुष्टि की है। हमले के बाद सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में नुकसान साफ दिखाई दे रहा है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। ईरान के अनुसार, अराक स्थित शाहिद खोंडाब भारी जल परिसर और यज्द प्रांत के अर्दकन येलोकेक उत्पादन संयंत्र को निशाना बनाया गया। ईरानी मीडिया के मुताबिक, इन हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ और रेडिएशन का खतरा भी नहीं है। हालांकि, इजरायल ने दावा किया है कि यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए बड़ा झटका है।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल पर भी मिसाइलें दागीं। तेल अवीव में तेज धमाके सुने गए और 11 स्थानों पर मिसाइल गिरने की खबर है। इस हमले में एक 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। बीर शेवा और परमाणु अनुसंधान केंद्र के आसपास भी सायरन बजाए गए। प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर यह पहला हमला नहीं है। 1 मार्च को हुए हमले में आर्मी सार्जेंट बेंजामिन एन. पेनिंगटन घायल हुए थे, जिनकी बाद में मौत हो गई थी। वह इस संघर्ष में मारे गए 13 अमेरिकी सैनिकों में शामिल थे।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, एक महीने से जारी संघर्ष में 300 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल, ज्यादातर सैनिक ड्यूटी पर लौट चुके, 30 सैनिक अभी भी फिट नहीं, 10 सैनिक गंभीर हालत में तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। करीब 1,000 अतिरिक्त सैनिक भेजे जा रहे हैं, दो मरीन यूनिट्स तैनात की जा रही हैं, कुल मिलाकर 5,000 से ज्यादा मरीन और हजारों नौसैनिक क्षेत्र में तैनात होंगे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका बिना जमीनी सैनिक उतारे भी अपने लक्ष्य हासिल कर सकता है।
अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव दिया था, लेकिन ईरान ने किसी भी तरह की बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इजरायल को चेतावनी दी है कि उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। ईरान के नियंत्रण वाले होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
हालांकि, तेहरान ने मानवीय सहायता और कृषि उत्पादों की आवाजाही को जारी रखने की बात कही है। मध्य पूर्व में जारी यह टकराव अब सीधे अमेरिका, इजरायल और ईरान को आमने-सामने ला चुका है। आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।





