महीनों से वेतन न मिलने से बढ़ी आर्थिक परेशानी, कृषि सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका
मुजफ्फरनगर। देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों में कार्यरत कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति सुधरे और किसानों को मिलने वाली सेवाएं प्रभावित न हों।
सपा सांसद और राष्ट्रीय महासचिव हरेन्द्र मलिक ने संसद में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के कर्मचारियों को वेतन न मिलने की गंभीर समस्या को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि देश के कई कृषि विज्ञान केंद्रों में कार्यरत कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। सांसद ने सदन को अवगत कराया कि वेतन भुगतान में हो रही देरी का सीधा असर कर्मचारियों के मनोबल पर पड़ रहा है। आर्थिक अस्थिरता के कारण वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी क्षमता से नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने यह भी चिंता जताई कि इस स्थिति का प्रभाव कृषि विस्तार सेवाओं पर पड़ सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को आधुनिक खेती, नई तकनीकों और प्रशिक्षण से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि वहां कार्यरत कर्मचारियों को नियमित वेतन नहीं मिलेगा, तो किसानों तक आवश्यक जानकारी और सेवाएं समय पर पहुंचने में बाधा आ सकती है। सांसद ने सरकार से मांग की कि इस समस्या का शीघ्र समाधान किया जाए और कृषि विज्ञान केंद्रों के कर्मचारियों के लिए नियमित व समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना था कि इससे न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि कृषि सेवाओं की निरंतरता भी बनी रहेगी।






