नगरपालिका के वार्ड-36 के सभासद चुनाव विवाद का पटाक्षेप, भाजपा प्रत्याशी पारूल मित्तल की एक वोट वाली जीत का निर्णय रहा कायम
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर के वार्ड 36 में सभासद पद पर हुए चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को एडीजे-4 कोर्ट ने खारिज कर दिया है। भाजपा नेता अचिंत मित्तल की पत्नी तथा भाजपा प्रत्याशी पारूल मित्तल के खिलाफ निर्दल प्रत्याशी रजनी गोयल की ओर से दायर की गई यह याचिका लगभग ढाई साल तक कोर्ट की कार्रवाई में रही। शुक्रवार को एडीजे-4 कोर्ट के न्यायाधीश कनिष्क कुमार ने विस्तृत सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपने दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहे।
नगरीय निकाय चुनाव 2023 में वार्ड 36 से हुए मतदान में भाजपा प्रत्याशी पारूल मित्तल को 1777 वोट मिले थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दल प्रत्याशी रजनी गोयल को 1776 वोट प्राप्त हुए। तीसरी प्रत्याशी सोनिया को 31 मत मिले थे। कुल 8479 पंजीकृत मतदाताओं में से 49.39 प्रतिशत ने मतदान किया था। कुल 3667 मतों की मतगणना के दौरान 69 वोट खारिज कर दिए गए थे। विधि मान्य 3598 मतों में मात्र एक वोट के अंतर से पारूल मित्तल को विजेता घोषित किया गया। मतगणना के दौरान रजनी गोयल के पति दीपक गोयल और समर्थकों ने धांधली के आरोप लगाए थे और उसी समय रि-काउंटिंग की मांग की थी, जिसे प्रशासन ने स्वीकार नहीं किया। याचिकाकर्ता रजनी गोयल की ओर से एडीजे-4 कोर्ट में दाखिल इलेक्शन पिटीशन में मतगणना में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए रि-काउंटिंग की मांग की गई थी। लेकिन कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि याचिकाकर्ता न तो मतगणना प्रक्रिया में किसी गड़बड़ी का ठोस प्रमाण दे सके और न ही रि-काउंटिंग की मांग का कोई वैध आधार प्रस्तुत कर पाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष भी ऐसा कोई अभिलेख या आपत्ति दर्ज नहीं पाई गई, जिससे मतगणना में त्रुटि सिद्ध हो सके।
कोर्ट से आये फैसले के बाद दीपक गोयल ने कहाकृ कि हमें अभी निर्णय की ऑर्डर कॉपी नहीं मिली है, लेकिन बताया गया है कि याचिका को साक्ष्यों के अभाव में खारिज किया गया है। सोमवार को हम आदेश की कॉपी प्राप्त करेंगे। हमारा केस मजबूत था। जीत हार एक वोट की थी, इसी कारण हमने रि-काउंटिंग की मांग की थी। कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। अधिवक्ता से चर्चा कर आगे का निर्णय लेंगे। उन्होंने बताया कि मई 2023 में याचिका दायर की गई थी और करीब ढाई साल मुकदमा चला। उनकी ओर से अधिवक्ता योगेन्द्र मित्तल ने पैरवी की।
भाजपा नेता अचिंत मित्तल ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि रजनी गोयल की ओर से दायर पिटीशन तथ्यात्मक आधार पर नहीं थी। कोर्ट ने साक्ष्यों की कमी के चलते इसे फर्जी, निराधार और असत्यकथन वाला पाया। गवाही में भी याचिकाकर्ता कुछ साबित नहीं कर सके। इसलिए अदालत ने पिटीशन को खारिज किया। सच की जीत हुई है। पारूल मित्तल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तेगबहादुर सैनी ने पैरवी की। उल्लेखनीय है कि रजनी गोयल ने मामले की जल्द सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भी रुख किया था, जिसके बाद इसे एडीजे-4 कोर्ट में फास्ट ट्रैक पर लिया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुना दिया।






