जांच के बाद भी कार्रवाई न होने से नाराज़ दिखे समर्थक, सुमित मलिक की बिगड़ने लगी हालत
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बार फिर जनआक्रोश देखने को मिल रहा है। सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित तीन सड़कों में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए समाजसेवी सुमित मलिक पिछले तीन दिनों से जिलाधिकारी कार्यालय पर भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

जनपद में सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई तीन सड़कों को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन्हीं आरोपों के विरोध में समाजसेवी सुमित मलिक बीते तीन दिनों से जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। सुमित मलिक का आरोप है कि इन सड़कों के निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई और घटिया सामग्री का प्रयोग कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। सुमित मलिक ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ सत्ता पक्ष एवं उसके सहयोगी दलों से जुड़े कुछ नेताओं पर भी आपसी गठजोड़ कर भ्रष्टाचार कराने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिकायत के बाद प्रशासन द्वारा जांच तो कराई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे भ्रष्टाचार को संरक्षण मिलने का संदेह गहराता जा रहा है। उन्होंने सीडीओ द्वारा स्थलीय निरीक्षण के साथ डीएम को सौंपी गई जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की भी मांग की ताकि जनता को हकीकत पता चल सके।

भूख हड़ताल के दौरान सुमित मलिक की तबीयत को लेकर भी समर्थकों में चिंता बनी हुई है, शनिवार को उनका स्वास्थ्य कमजोर दिखाई दिया, लेकिन प्रशासन की ओर से केवल निगरानी तक सीमित कार्रवाई होने से आंदोलनकारी असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। इस आंदोलन को ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है। पीनना गांव से संजय मलिक, गौरव पवार, बॉबी पवार और कुलदीप पवार धरनास्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन जता चुके हैं। वहीं पर्यावरण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र कोच, हिमांशु चौधरी और श्रीकांत त्यागी ने भी धरने पर पहुंचकर सुमित मलिक के आंदोलन को जायज़ ठहराया और भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने की बात कही। समर्थकों का कहना है कि यदि शीघ्र ही दोषी अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।






