ट्रंप वैश्विक टैरिफ़ अवैध करार देते हुए अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 6-3 के बहुमत से बड़ा फैसला सुनाया। चीफ़ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बिना कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति के इतने व्यापक टैरिफ़ लागू करना राष्ट्रपति की सीमा से बाहर था। इस फैसले को ट्रंप प्रशासन की अहम आर्थिक नीति पर बड़ा झटका माना जा रहा है।
ट्रंप वैश्विक टैरिफ़ अवैध: 6-3 बहुमत से निर्णय
सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया। छह जजों ने टैरिफ़ को अवैध बताया, जबकि तीन जजों ने असहमति जताई। अदालत ने ट्रंप के इस तर्क को खारिज कर दिया कि 1977 का कानून, इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट, अप्रत्यक्ष रूप से टैरिफ़ लगाने की अनुमति देता है। जस्टिस रॉबर्ट्स ने लिखा,
“अगर कांग्रेस टैरिफ़ लगाने जैसी असाधारण शक्ति देना चाहती, तो वह इसे स्पष्ट रूप से कर सकती है.”
170 अरब डॉलर के रिफंड पर अनिश्चितता
फैसले में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सरकार को पहले से वसूले गए टैरिफ़ राजस्व को वापस करना होगा या नहीं। इस मुद्दे पर अदालत ने निर्णय निचली अदालत पर छोड़ दिया। ब्लूमबर्ग के अनुसार, रिफंड की राशि 170 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है, जो टैरिफ़ से वसूले गए कुल राजस्व के आधे से अधिक है। हालांकि ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि 2026 में टैरिफ़ से हासिल राजस्व में कोई बदलाव नहीं होगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्या असर?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के साथ हुई ट्रेड डील पर असर के सवाल पर ट्रंप ने कहा,
“कुछ भी नहीं बदला है. भारत टैरिफ़ का भुगतान करेगा. हम टैरिफ़ का भुगतान नहीं करेंगे.”
भारत और अमेरिका की ट्रेड डील के तहत अमेरिका में जाने वाले भारतीय सामान पर सामान्य टैरिफ़ दर 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है। हालांकि भारत पर पूरे 18 प्रतिशत टैरिफ़ दर के लिए कानूनी आधार अभी स्पष्ट नहीं है।
ट्रंप ने नए टैरिफ़ की घोषणा की
फैसले के बावजूद ट्रंप ने पीछे हटने से इनकार किया। उन्होंने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ़ पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की, जो तीन दिनों में प्रभावी होंगे। ये टैरिफ़ अधिकतम 150 दिनों के लिए वैध होंगे। सेक्शन 232 और सेक्शन 301 के तहत लगाए गए टैरिफ़ जारी रहेंगे।
तीन कंजर्वेटिव जजों की असहमति
क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल एलिटो और ब्रेट कैवनॉ ने फैसले से असहमति जताई। कैवनॉ ने कहा कि 1977 का कानून राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान राष्ट्रपति को अधिक बारीक तरीके से टैरिफ़ लगाने की अनुमति देता है। ट्रंप ने फैसले को “भयानक और हास्यास्पद” बताया और कहा, “यह निर्णय गलत है. लेकिन इससे फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि हमारे पास बहुत शक्तिशाली विकल्प हैं यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की किसी नीति को निर्णायक रूप से रद्द किया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यापार नीति पर कार्यपालिका और विधायिका के लंबे सहयोग को दरकिनार कर राष्ट्रपति को अनियंत्रित शक्ति नहीं दी जा सकती। ट्रंप वैश्विक टैरिफ़ अवैध करार दिए जाने के इस फैसले ने अमेरिकी व्यापार नीति, भारत-अमेरिका संबंध और वैश्विक बाजारों में नई बहस छेड़ दी है।






