संगठन छोड़ने वालों को राकेश टिकैत ने बताया चमगादड़

मुजफ्फरनगर। सिसौली के किसान भवन में रविवार को आयोजित मासिक पंचायत में भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने संगठन से जुड़े रहने का संदेश देते हुए किसानों को एकजुटता की ताकत याद दिलाई। पंचायत शुरू होने से पहले टिकैत पुराने बरगद के पेड़ के नीचे पहुंचे और उसी को उदाहरण बनाकर संगठन की जड़ों से जुड़े रहने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि जो लोग भाकियू को छोड़कर गए हैं, वे उसी पेड़ की शाखाओं से लटकते चमगादड़ों की तरह हैं, जिनका कोई महत्व नहीं होता।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) प्रवक्ता राकेश टिकैत ने रविवार को सिसौली के किसान भवन में आयोजित यूनियन की मासिक पंचायत में शिरकत की। इस पंचायत के शुरू होने से पहले उन्होंने किसान भवन परिसर में लगे एक पुराने बरगद के पेड़ की छांव से कार्यकर्ताओं को संगठन से जुड़ाव और एकजुटता का संदेश दिया। राकेश टिकैत किसान भवन परिसर में स्थित 39 साल पुराने बरगद के पेड़ के नीचे कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे और संगठन छोड़कर जाने वालों पर कटाक्ष करते हुए उन्हें चमगादड़ करार दिया।

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टिकैत ने कहा कि किसान आंदोलन की ताकत एकता और त्याग से आती है। उन्होंने 13 अगस्त को आयोजित ट्रैक्टर मार्च को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि किसानों ने बड़ी हिम्मत दिखाई और सड़कों पर उतरकर अपनी ताकत का अहसास कराया। इस मौके पर उन्होंने यूनियन के बुजुर्ग सिपाही धर्मवीर सिंह का सम्मान किया। धर्मवीर सिंह महेन्द्र सिंह टिकैत के साथ ही यूनियन से जुड़े और आज तक काम कर रहे हैं। राकेश टिकैत ने उनकी सादगी और समर्पण की प्रशंसा करते हुए याद दिलाया कि धर्मवीर सिंह ने किसान आंदोलन में 13 महीने तक खाट और हुक्का लेकर डटे रहकर योगदान दिया।

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धर्मवीर सिंह को यूनियन की जड़ बताया और पुराने बरगद के पेड़ की ओर इशारा करते हुए उल्लेख करते हुए टिकैत ने कहा कि यह पेड़ 39 साल पहले चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने किसान भवन की स्थापना के समय अपने हाथों से लगाया था। इसकी जड़ संगठन का प्रतीक है। जो लोग जड़ों से जुड़े हैं, वे ही मजबूत टहनियों की तरह पल्लवित होते हैं। लेकिन जो लोग संगठन छोड़कर चले जाते हैं, वे इस पेड़ पर रात के अंधेरे में उलटे लटके चमगादड़ों के समान है, जो रहते तो फिर भी पेड़ के साथ ही है, लेकिन उनको न तो उजाला नसीब हो पाता है और ही पेड़ की पल्लवित होती टहनियों जैसा सम्मान।

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राकेश टिकैत ने बागियों को नसीहत देते हुए कहा कि संगठन को छोड़ने के बाद भी ऐसे लोग भाकियू की छाया से बाहर नहीं जा पाते। उन्होंने कहा कि यूनियन से टूटकर बहुत संगठन बन गए, लेकिन पुराना पेड़ वही होता है, जो जड़ों से मजबूती पाता है। जड़ से अलग हुए तनों का कोई महत्व नहीं होता और वो पुराने पेड़ के साथ रहकर भी हास्य का एक पात्र बनकर रह जाते हैं। इस दौरान राकेश टिकैत के संबोधन में किसानों को संदेश भी साफ रहाकृकि जड़ों से जुड़े रहो, एकजुट रहो और संगठन की ताकत को कभी कमज़ोर मत पड़ने दो।

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