प्रदूषण को लेकर भाकियू अराजनैतिक का हमला तेज, प्रशासन,दृउद्योगदृऔर नागरिकों के बीच भरोसा टूटा, चांदपुर में नुक्कड़ सभा में उठी कड़ी मांगें
मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने जिले में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण को लेकर प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हुए चांदपुर में एक नुक्कड़ सभा आयोजित की। सभा में ग्रामीणों ने खुलकर आरोप लगाया कि उद्योगों द्वारा कचरा जलाने, दूषित पानी छोड़ने और धुएं के कारण गांवों में सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है। सभा की अध्यक्षता रामकुमार ने की जबकि संचालन मोहित ने किया।
ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन, उद्योग और नागरिक समूह के बीच भरोसा लगभग खत्म हो चुका है। चांदपुर के मांगेराम ने बताया कि पहले स्वास्थ्य विभाग ने पानी की जांच कराई, लेकिन समस्या का कारण पता करने के बजाय नलकूपों को लाल निशान लगाकर बंद कर दिया गया। “रात में सांस रुकने जैसा भारीपन होता है, बच्चों में जन्मजात बीमारियां बढ़ रहीं हैं, लेकिन विभाग समस्या की जड़ समझने को तैयार नही। ग्रामीणों ने चेताया कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो लोग जल्द ही पलायन को मजबूर होंगे।
भाकियू अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि जिले की कई औद्योगिक इकाइयों में कचरा और टायर आदि जलाए जाने से जहरीला धुआं निकलता है, जो सीधे लोगों के घरों और फेफड़ों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहाकृ कि आपने महसूस किया होगा कि हवा भारी लगती है, खांसी बढ़ गई है, आंखों में जलन होती है। यह कोई अफवाह नहीं, बल्कि कचरा जलाने का सीधा असर है। डॉक्टर भी इसे दमा, फेफड़ों की बीमारी और कैंसर तक का कारण मानते हैं। मलिक ने लोगों से अपील की कि वे संस्थाओं से सवाल पूछें और साफ हवा के अपने संवैधानिक अधिकार के लिए आवाज उठाएं।
धर्मेंद्र मलिक ने जिलाधिकारी से मांग की कि पेपर मिलों और अन्य प्रदूषणकारी इकाइयों से लिए जाने वाले कचरे, धुएं, पानी, मिट्टी और हवा के नमूनों की जांच किसी निष्पक्ष संस्था की मौजूदगी में कराई जाए, ताकि किसी पक्ष पर पक्षपात का आरोप न लगे। भाकियू अराजनैतिक ने जिला उद्योग अधिकारी से मांग की कि प्रत्येक औद्योगिक इकाई अपने गेट पर बोर्ड लगाए जिसमें यह जानकारी साफ-साफ दर्ज हो कि किस ईंधन का उपयोग हो रहा है, कितना कच्चा माल प्रयोग किया जाता है, कितना पानी छोड़ा जाता है, किस वैज्ञानिक की निगरानी में पर्यावरण परीक्षण होता है।
यूनियन ने प्रशासन से पूछा कि कचरा जलाने की अनुमति किस नियम के तहत दी गई है, जबकि मुजफ्फरनगर का उद्योग उस श्रेणी में आता ही नहीं जहां ऐसा करना वैध हो। मलिक ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि हमारा दावा गलत है तो उद्योग और विभाग खंडन कर साक्ष्य सार्वजनिक करें। सभा में सुधीर पंवार, अंकित जावला, दुष्यंत, मांगेराम, कोकिल पंवार, भारत सिंह, जाबिर राणा, शहजाद राव, जयवीर ठाकरान, दीपक मलिक, मनीष तोमर, किशन सिंह, सुभाष चौधरी, रविन्द्र सिंह सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। बताया जा रहा है कि लगातार बढ़ते दबाव के बाद पर्यावरण विभाग ने कल भोपा रोड स्थित कई औद्योगिक इकाइयों से नमूने संग्रह किए हैं। सूत्रों के अनुसार, इन इकाइयों के विरुद्ध जल्द ही बड़ी कार्रवाई संभव है।


