पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। मुस्लिम समाज के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में उन्हें औपचारिक रूप से सदस्यता दिलाई।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ 15,758 समर्थकों ने भी सपा की सदस्यता ग्रहण की। इनमें बड़ी संख्या बसपा पृष्ठभूमि के कार्यकर्ताओं की बताई जा रही है।
सपा में शामिल होने के बाद नसीमुद्दीन ने कहा कि वह पार्टी में सबसे जूनियर हैं और सभी नेता उनके वरिष्ठ हैं। उन्होंने अखिलेश यादव की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कभी जाति या धर्म की राजनीति नहीं की, बल्कि सबको साथ लेकर चलने की बात की।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने शायरी के जरिए राजनीतिक संदेश भी दिया और 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराध चरम पर है और लोकतांत्रिक आवाजों को दबाया जा रहा है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 24 जनवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। चर्चा थी कि वह आजाद समाज पार्टी का रुख कर सकते हैं या नई राजनीतिक रणनीति बना सकते हैं। हालांकि अंततः उन्होंने सपा में शामिल होकर राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम यूपी में सपा को इससे संगठनात्मक मजबूती मिल सकती है, खासकर मुस्लिम मतदाताओं के बीच।






