एमआईटूसी कंपनी को फटकार, ईओ डाॅ. प्रज्ञा सिंह के हस्तक्षेप के बाद खुली हड़ताल

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् के साथ सफाई व्यवस्था में काम कर रही निजी क्षेत्र की कंपनी एमआईटूसी के साथ कर्मचारियों के चल रहे प्रकरण को लेकर एक बार फिर से हड़ताल हो गई। आयोग के सदस्य के समक्ष मुद्दा उठा तो समाधान के लिए ईओ डाॅ. प्रज्ञा सिंह ने कंपनी को तलब कर लिया। समझौता वार्ता के दौरान कर्मचारियों की शिकायत का समाधान नहीं करने पर कंपनी को फटकार भी लगाई और कर्मचारियों को भी चेतावनी दी गई। इसके बाद कर्मचारियों ने बंद किये गये वाहनों की चाबियां कंपनी को सौंप दी। पालिका की ओर से कंपनी को कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। इसके साथ ही कंपनी के मुख्य मालिक को भी मुजफ्फरनगर आने के लिए कहा गया है।

शहर में पालिका प्रशासन के साथ अनुबंध के आधार पर डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम कर रही एमआईटूसी प्रा. लि. नई दिल्ली के साथ कर्मियों का चल रहा विवाद फिर से हड़ताल तक पहुंच गया। 27 फरवरी को नौकरी से निकाले गये 13 कर्मचारियों के समर्थन, वेतन, ईपीएफ और ईएसआई देयकों का भुगतान नहीं करने और अन्य समस्याओं को लेकर कंपनी के साथ काम कर रहे सुपरवाइजरों, वाहन चालकों और हेल्पर सफाई कर्मियों ने कामबंद हड़ताल कर दी। कंपनी द्वारा डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए वार्डों में लगाये गये टिपर गारबेज वाहनों की चाबियां लेकर भी कर्मचारी गायब हो गये। आज भी कर्मचारी कामबंद हड़ताल पर रहे और नगरपालिका पहुंचे यूपी एससी-एसटी आयोग के सदस्य महिपाल सिंह वाल्मीकि के सम्मुख अपनी समस्या उठाते हुए कंपनी के खिलाफ शिकायत की।

इसके पश्चात ईओ डाॅ. प्रज्ञा सिंह ने अपने कार्यालय कक्ष में एमआईटूसी कंपनी के लोगों और सफाई कर्मचारियों के बीच मध्यस्थता करते हुए समझौता वार्ता बुलाई, जो करीब दो घंटे तक चली। इस दौरान कर्मचारियों की शिकायतों को कंपनी के सामने रखा गया तो कंपनी की ओर से रखी गई समस्याओं को भी सुना गया। कंपनी के परियोजना प्रबंधक ओमप्रकाश दूबे और प्रोजेक्ट इंचार्ज कुलदीप कुमार ने बताया कि सफाई कर्मचारी दूसरे कर्मियों को बरगला कर आये दिन हड़ताल करा रहे हैं। गुरूवार को भी कर्मचारियों को बरगला कर हड़ताल कराते हुए वाहनों की चाबियां लेकर फरार हो गये, जिस कारण वार्डों में कूड़ा कलेक्शन नहीं हो पाया। वार्डों से यूजर चार्ज वसूलने के बाद भी कंपनी को जमा नहीं कराया जा रहा है, ऐसे में गंभीर आरोपों के कारण ही कुछ कर्मियों को नौकरी से हटाया गया। अधिकांश कर्मियों का वेतन, ईपीएफ और ईएसआई देयकों का भुगतान कंपनी कर रही है, लेकिन आधार और दूसरे दस्तावेजों में खामियां होने के कारण काफी कर्मचारी इस लाभ से वंचित हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उत्पीड़न पर आवाज उठाने पर नौकरी से निकलाने के साथ ही कंपनी के लोग धमकी देते हैं, कुछ बातचीत की रिकाॅर्डिंग भी वार्ता के दौरान उन्होंने ईओ को सुनाई, जिसमें धमकी दी जा रही है।

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ईओ डाॅ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए एमआईटूसी कंपनी के मुख्य मालिक आनन्द कुमार से फोन पर वार्ता कर सारी स्थिति बताई गई और पता चला कि मालिक और प्राइमरी वर्कर्स के बीच संवाद के अभाव में ही समस्या विकराल हुई हैं। उन्हें समाधान के लिए मुजफ्फरनगर आकर कर्मचारियों से वार्ता करने के लिए कहा गया है। कर्मियों से वाहनों की चाबियां मंगाकर कंपनी के लोगों को दिलाई गई हैं, इसके साथ ही हड़ताल खुलवा दी गई। इसके साथ ही कंपनी को निर्देश दिये गये कि वो एक सप्ताह में वेतन, ईपीएफ, ईएसआई सहित अन्य सभी देयकों का भुगतान एक सप्ताह में कर्मचारियों को करे। सुपरवाइजरों को चेतावनी दी गई कि वो यदि वसूला गया यूजर चार्ज का पैसा कंपनी को जमा नहीं करायेंगे तो उनके खिलाफ कंपनी कार्यवाही करेगी। साथ ही मानवीय दृष्टिकोण के आधार पर कंपनी से कहा गया है कि यदि कोई गंभीर अपराध नहीं हुआ है तो निकाले गये 13 कर्मचारियों को नौकरी पर वापस रखने की संभावना को तलाश किया जाये। कर्मचारियों को भी चेताया गया कि छोटी बातों पर वो हड़ताल नहीं करेंगे। ईओ ने बताया कि वार्ता के दौरान कर्मचारियों ने यह भी स्वीकार किया कि वो अपनी बात लेकर कभी पालिका तक नहीं आये। जिलाधिकारी और फिर मंत्री कपिल देव को समस्या से अवगत कराया गया था, जिसको लेकर मिले दिशा निर्देश पर कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर कार्यवाही चल रही है। 

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