IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड के खुलासे के बाद सोमवार को बैंक के शेयर में भारी बिकवाली हुई। स्टॉक 20% गिरकर ₹66.85 के इंट्राडे लो पर पहुंच गया और एक ही सत्र में लगभग ₹14,000 करोड़ का मार्केट कैपिटलाइजेशन स्वाहा हो गया। यह गिरावट तब आई जब बैंक ने अपनी चंडीगढ़ ब्रांच से जुड़े अकाउंट्स में ₹590 करोड़ के संदिग्ध फ्रॉड ट्रांजैक्शन का खुलासा किया। इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर बड़े शेयरहोल्डर्स पर पड़ा। भारत सरकार, जिसके पास बैंक में लगभग 7.75% हिस्सेदारी है, ने एक ही ट्रेडिंग सत्र में करीब ₹1,100 करोड़ की वैल्यू गंवाई। करीब 2.35% होल्डिंग वाली लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) को लगभग ₹340 करोड़ का नुकसान हुआ। रिटेल इन्वेस्टर्स, जिनके पास बैंक का लगभग 28% हिस्सा है, को कुल मिलाकर ₹4,000 करोड़ से ज्यादा के नुकसान का अनुमान है।
₹590 करोड़ के फ्रॉड का खुलासा कैसे हुआ
बैंक के डिस्क्लोजर के अनुसार, मामला चंडीगढ़ ब्रांच में मैनेज किए जा रहे सरकारी अकाउंट्स से जुड़े ₹590 करोड़ के संदिग्ध फ्रॉड ट्रांजैक्शन से जुड़ा है। कुछ अकाउंट बंद करने और बैलेंस ट्रांसफर के निर्देश मिलने के बाद इंटरनल जांच में गड़बड़ियां सामने आईं। बैंक ने चार कर्मचारियों को सस्पेंड किया है। फोरेंसिक ऑडिट शुरू किया गया है और कानून लागू करने वाली एजेंसियों में शिकायत दर्ज कराई गई है। संभावित रिकवरी के लिए लियन लगाने और जहां संभव हो रिवर्सल की मांग जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
मार्केट खुलते ही स्टॉक लोअर सर्किट पर पहुंच गया। निवेशकों की चिंता फ्रॉड की राशि से ज्यादा इंटरनल कंट्रोल्स और गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स को लेकर दिखाई दी। ₹14,000 करोड़ की गिरावट फ्रॉड की वैल्यू का लगभग 24 गुना है, जो यह दर्शाता है कि बाजार वित्तीय संस्थानों में गवर्नेंस की कमी को कैसे दंडित करता है। नोमुरा के अनुसार, ₹590 करोड़ की रकम बैंक के अनुमानित FY26 प्रॉफिट का लगभग 28% है। यदि रिकवरी में देरी होती है तो कमाई पर जोखिम बढ़ सकता है।
UBS ने संभावित असर को FY26 प्रॉफिट का लगभग 22% बताया, लेकिन यह भी कहा कि कैपिटल बफर मजबूत होने से नेट वर्थ पर असर लगभग 1% तक सीमित रह सकता है। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि यह फ्रॉड टैक्स से पहले सालाना प्रॉफिट का लगभग पांचवां हिस्सा घटा सकता है। हालांकि इसे सिस्टमिक के बजाय ऑपरेशनल मामला बताया गया है। जेपी मॉर्गन ने कहा कि बैंक की बैलेंस शीट मजबूत है और ग्रोथ का रास्ता बरकरार है, लेकिन गवर्नेंस पर असर वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकता है।
खुलासे के बाद हरियाणा सरकार ने IDFC फर्स्ट बैंक को सरकारी बिजनेस पैनल से हटा दिया। विभागों को बैलेंस शिफ्ट करने और अकाउंट्स रिकंसाइल करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि RBI ने संकेत दिया है कि इस घटना से सिस्टमिक रिस्क नहीं है, लेकिन वह पूरे मामले पर करीब से नजर रख रहा है।





