कड़ी सुरक्षा और डिजिटल निगरानी के बावजूद कई चैम्बरों से एसी के तांबे के तार चोरी, अधिवक्ताओं ने किया प्रदर्शन
मुजफ्फरनगर। जिला कचहरी परिसर में पिछले एक सप्ताह से हो रही लगातार चोरियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अज्ञात शातिर चोर ने अधिवक्ताओं के कक्षों में लगे एसी की मशीनों से तांबे के तार चोरी कर सनसनी फैला दी है। कड़ी पुलिस चौकसी, सीसीटीवी कैमरों और उच्च अधिकारियों के कार्यालयों की मौजूदगी के बावजूद चोरी की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रहीं।
इससे अधिवक्ताओं में भारी रोष व्याप्त है। गुरूवार को सवेरे जब अधिवक्ता पहुंचे तो डीएम कार्यालय के पास वाले चैम्बरों में भी चोरी की वारदात होने से रोष उत्पन्न हो गया। एकत्र अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन का आक्रोश व्यक्त किया।
अधिवक्ताओं के अनुसार, बीते एक सप्ताह से उनके चैम्बरों में लगे एसी की बाहरी मशीनों से तांबे के तार चोरी किए जा रहे हैं। गुरूवार को अधिवक्ता हुकमचंद मलिक और राकेश मलिक के चैम्बरों में चोरी की गई। अब तक 8 से 9 चैम्बरों में चोरी के मामले हो चुके हैं। गुरुवार सुबह जब अधिवक्ता रोज़ाना की तरह कचहरी पहुंचे, तो कई चैम्बरों में चोरी की घटना सामने आई। इसके बाद अधिवक्ता एकत्र हो गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर आक्रोश जताया।
अधिवक्ताओं का कहना है कि उन्होंने मामले की लिखित शिकायत पुलिस को दे दी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि पुलिस लापरवाही बरत रही है और शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
जिला कचहरी परिसर में ही एसएसपी और डीएम के कार्यालय स्थित हैं। ऐसे संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में चोरी की वारदात होना सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहा है। परिसर में सीसीटीवी कैमरे और नियमित पुलिस पहरा होने के बावजूद शातिर चोर लगातार घटनाओं को अंजाम दे रहा है। अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि इतने सुरक्षित क्षेत्र में भी अपराधी सक्रिय हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई, तो वे व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
अधिवक्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि चोरी की घटनाओं की गंभीरता से जांच कर दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। साथ ही, कचहरी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए तथा सीसीटीवी फुटेज की तत्काल जांच कर अपराधियों की पहचान सुनिश्चित की जाए। जिला कचहरी जैसे अति-सुरक्षित क्षेत्र में हो रही इन घटनाओं ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में कितनी शीघ्रता और गंभीरता से कार्रवाई करता है।






