पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका इस्राइल हथियार सौदा के तहत अमेरिका ने इस्राइल को 151 मिलियन डॉलर (लगभग 1300 करोड़ रुपये) के भारी बमों की आपूर्ति को मंजूरी दे दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार देर रात इस सौदे की घोषणा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और संभावित खतरों से निपटने के लिए आवश्यक बताया है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कदम इस्राइल की सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और क्षेत्रीय खतरों के खिलाफ उसकी रक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस अमेरिका इस्राइल हथियार सौदा के तहत आपातकालीन पैकेज में BLU-110A/B सामान्य उपयोग वाले बम शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिका इस्राइल को लॉजिस्टिक सहायता और अन्य आवश्यक सपोर्ट सेवाएं भी उपलब्ध कराएगा।
अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि इस सौदे को आपातकालीन स्थिति का हवाला देते हुए संसद की सामान्य समीक्षा प्रक्रिया को दरकिनार कर मंजूरी दी गई है। विभाग के अनुसार यह सौदा अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में है। अधिकारियों का कहना है कि यह हथियार सौदा पश्चिम एशिया में अमेरिका के एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस्राइल इन बमों का इस्तेमाल किस विशेष स्थान या अभियान के लिए करेगा। माना जा रहा है कि यह सौदा इस्राइल की वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और क्षेत्रीय खतरों के खिलाफ निवारक शक्ति के रूप में काम करने में मदद करेगा।
इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने एक बयान में कहा कि अमेरिका की ओर से ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जा सकता है। उनके अनुसार इस अभियान का मुख्य लक्ष्य ईरानी मिसाइल लॉन्चिंग स्थल और मिसाइल निर्माण कारखाने होंगे, ताकि ईरान की सैन्य उत्पादन क्षमता को कमजोर किया जा सके। स्कॉट बेसेंट ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण क्षेत्र में आर्थिक और रणनीतिक अस्थिरता का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्गों में से एक है। अमेरिका और इस्राइल पहले से ही ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल हैं और हाल के दिनों में कई बड़े हमले किए गए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने व्हाइट हाउस के सहयोगियों और रिपब्लिकन नेताओं के साथ बातचीत में इस विकल्प का उल्लेख किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप फिलहाल बड़े पैमाने पर जमीनी हमले की योजना पर चर्चा नहीं कर रहे हैं, बल्कि सीमित संख्या में अमेरिकी सैनिकों को विशेष रणनीतिक मिशनों के लिए भेजने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और इस मुद्दे पर आधिकारिक घोषणा भी नहीं की गई है।






