उत्तर प्रदेश में जमीन की खरीद-फरोख्त को सुरक्षित बनाने के लिए रजिस्ट्री से पहले मालिकाना हक की जांच की नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार का मानना है कि इससे जमीन से जुड़े विवाद, फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी के मामलों पर प्रभावी रोक लगेगी तथा भू-माफियाओं के अवैध कारोबार पर भी बड़ा प्रहार होगा। अक्सर देखा जाता है कि जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद खरीदार को पता चलता है कि जमीन विवादित है या उस पर किसी अन्य व्यक्ति का दावा है।
कई मामलों में दस्तावेजों में गड़बड़ी या फर्जी कागजात के आधार पर भी जमीन का सौदा कर दिया जाता है। नई व्यवस्था में रजिस्ट्री से पहले ही इन सभी पहलुओं की अनिवार्य जांच की जाएगी। प्रॉपर्टी विशेषज्ञ प्रदीप मिश्रा के अनुसार रजिस्ट्री से पहले मालिकाना हक की जांच लागू होने से भविष्य में संपत्ति विवादों की संख्या कम हो सकती है। जब जमीन की वास्तविक स्थिति और दस्तावेजों की पुष्टि पहले ही हो जाएगी तो फर्जी सौदे और डुप्लीकेट कागजात के जरिए होने वाली धोखाधड़ी की संभावनाएं स्वतः कम हो जाएंगी। उनका कहना है कि इससे जमीन खरीदने वाले लोगों में भरोसा बढ़ेगा और निवेश का माहौल भी मजबूत होगा। लंबे समय से कुछ लोग फर्जी दस्तावेजों और कानूनी खामियों का फायदा उठाकर जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री करते रहे हैं।
यदि रजिस्ट्री प्रक्रिया में ही कड़ी जांच की व्यवस्था लागू होती है तो ऐसे तत्वों के लिए फर्जी जमीन सौदे करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। योगी सरकार पहले से ही भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अवैध कब्जे हटाने के अभियान पर जोर दे रही है। ऐसे में यह नई व्यवस्था उस अभियान को और मजबूत आधार दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन से जुड़े लेनदेन जब अधिक पारदर्शी और सुरक्षित होंगे तो निवेशकों तथा खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा। इससे रियल एस्टेट क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बनेगा और शहरी तथा औद्योगिक विकास की योजनाओं को भी गति मिलने की संभावना है।
इसी बीच स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने जानकारी दी कि योगी सरकार नगर निकायों, विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद को कुल 3300 करोड़ रुपये जारी करने जा रही है। उन्होंने बताया कि शहरी विकास के लिए संपत्तियों की रजिस्ट्री पर दो प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप शुल्क लिया जाता है, जिसे शहरों में सड़क, सीवर, ड्रेनेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 का लगभग 1300 करोड़ रुपये इसी माह जारी किया जाएगा, वित्तीय वर्ष 2025-26 का लगभग 2000 करोड़ रुपये अप्रैल में नए वित्त वर्ष की शुरुआत में जारी होगा।
इस तरह कुल 3300 करोड़ रुपये विकास कार्यों के लिए निकायों और प्राधिकरणों को दिए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि रजिस्ट्री से पहले मालिकाना हक की जांच लागू होने से आम लोगों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रहेगी और जमीन खरीदने में होने वाले जोखिम काफी हद तक कम हो जाएंगे। आने वाले समय में यह पहल प्रदेश में संपत्ति बाजार को अधिक विश्वसनीय बनाने और जमीन से जुड़े विवादों को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।






