ईरान युद्ध के 33वें दिन पश्चिम एशिया में सैन्य हमलों के साथ कूटनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। रूस की विदेशी खुफिया एजेंसी एसवीआर के प्रमुख सर्गेई नारिशकिन ने कहा है कि ईरान की स्थिति को लेकर उनकी एजेंसी अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के संपर्क में है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह युद्ध दो से तीन हफ्तों में खत्म हो सकता है, जबकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वॉशिंगटन की बातचीत पर भरोसा न होने की बात कही है।
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने बुधवार को भी ईरान में हमले जारी रखे। ईरानी मीडिया और अन्य रिपोर्टों में इस्फ़हान तथा फ़ारोख़शहर में औद्योगिक और औषधि से जुड़े ठिकानों पर हमलों का जिक्र है। टाइम्स ऑफ इजरायल में प्रकाशित रॉयटर्स आधारित रिपोर्ट के अनुसार, सर्गेई नारिशकिन ने 1 अप्रैल को कहा कि एसवीआर ईरान की स्थिति को लेकर अपने अमेरिकी समकक्ष सीआईए के संपर्क में है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस पर आरोप लगते रहे हैं कि उसने ईरान को खुफिया और तकनीकी मदद दी।
हाल के दिनों में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने आरोप लगाया था कि रूस ईरान को खुफिया मदद दे रहा है। दूसरी तरफ रूस ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह इस संकट के राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान की संभावना पर ईरान के साथ चर्चा कर रहा है। ऐसे में रूस-सीआईए संपर्क को युद्ध विराम की संभावित कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि अभी नहीं हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका का सैन्य अभियान दो से तीन हफ्तों में खत्म हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को युद्ध रुकवाने के लिए उनके साथ किसी समझौते पर पहुंचने की जरूरत नहीं है। यह बयान ट्रंप के पहले के सख्त रुख से अलग माना जा रहा है। इससे पहले वह ईरान पर दबाव बढ़ाने और उसके रणनीतिक ढांचे को निशाना बनाने की चेतावनी देते रहे थे। अब उनके ताज़ा बयान ने यह संकेत दिया है कि वॉशिंगटन सैन्य लक्ष्य हासिल होने के बाद पीछे हटने का विकल्प खुला रखे हुए है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच कुछ संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है, लेकिन इसका मतलब औपचारिक बातचीत नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें वॉशिंगटन की बातचीत पर भरोसा नहीं है। यानी एक तरफ अमेरिका युद्ध जल्द खत्म होने का संकेत दे रहा है, तो दूसरी तरफ तेहरान अभी भी अमेरिकी इरादों को लेकर आश्वस्त नहीं दिख रहा। यही वजह है कि कूटनीतिक रास्ता खुला होने के बावजूद भरोसे का संकट बना हुआ है।
यह निष्कर्ष उपलब्ध सार्वजनिक बयानों से निकलता है। इस बीच पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश भी मध्यस्थता की कोशिशों में सक्रिय बताए गए हैं। रॉयटर्स के अनुसार पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर युद्ध विराम और बातचीत का रास्ता सुझाया है, जबकि अन्य रिपोर्टों में अमेरिका-ईरान संवाद के लिए पाकिस्तान की भूमिका का भी जिक्र हुआ है। हालांकि अब तक किसी निर्णायक सफलता या औपचारिक शांति समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। यही वजह है कि क्षेत्रीय मध्यस्थता की कोशिशों के बीच अब रूस की सीआईए से सीधी संपर्क रेखा ज्यादा चर्चा में है।
फिलहाल यह देखना होगा कि यह संपर्क सिर्फ सूचना विनिमय तक सीमित रहता है या युद्ध विराम की ठोस दिशा भी बनाता है। यह अंतिम वाक्य उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित विश्लेषण है। ईरान युद्ध के समानांतर लेबनान में भी तनाव बढ़ा हुआ है। इजरायल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने दक्षिणी लेबनान के सीमावर्ती घरों को ध्वस्त करने और विस्थापित लोगों की वापसी रोकने की बात कही है।
इस बयान ने क्षेत्रीय संकट को और गहरा कर दिया है। फिलहाल तस्वीर यह है कि ईरान युद्ध में सैन्य हमले जारी हैं, अमेरिका जल्द निष्कर्ष की बात कर रहा है, ईरान भरोसा नहीं जता रहा, पाकिस्तान समेत कई देश मध्यस्थता में लगे हैं, और अब रूस ने भी अपने खुफिया चैनल के जरिए अमेरिका से संपर्क की बात सार्वजनिक कर दी है। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह संपर्क महज कूटनीतिक संकेत है या सचमुच युद्ध रोकने की दिशा में कोई ठोस कदम। अगर चाहें, मैं इसी खबर का और ज्यादा भास्कर-स्टाइल, हाई-सीटीआर, गूगल डिस्कवर-फ्रेंडली संस्करण भी दे दूँ।






