मेरठ अल्फा हॉस्पिटल का नाम कानपुर के कथित अवैध किडनी ट्रांसप्लांट प्रकरण में सामने आने के बाद बुधवार को अस्पताल के भीतर बेचैनी और बाहर जांच का दबाव एक साथ दिखाई दिया। मेरठ के गढ़ रोड स्थित मंगल पांडे नगर में बने इस अस्पताल को CMO डॉ. अशोक कटारिया ने नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी अस्पताल से जानकारी जुटाने पहुंचीं।
अस्पताल में डायरेक्टर और नियमित OPD से जुड़े डॉक्टर उस समय नजर नहीं आए।
CMO कार्यालय का कहना है कि कानपुर प्रकरण की जांच में अल्फा हॉस्पिटल से जुड़े कुछ नाम सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक नोटिस में फिजियोथेरेपिस्ट अमित कुमार, दंत चिकित्सक डॉ. वैभव मुद्गल और डॉ. अफजाल सहित कुछ अन्य नामों का जिक्र करते हुए अस्पताल प्रबंधन से पूछा गया है कि इन लोगों का इस प्रकरण से क्या संबंध है। जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो आगे की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
उसमें कहा गया है कि नोटिस की कॉपी डीएम और एसएसपी को भी भेजी गई है, और तीन दिन में स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर अस्पताल को सील करने तक की चेतावनी दी गई है। उसी रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि मेडिकल थाने की पुलिस अस्पताल पहुंचकर नामजद लोगों और प्रबंधन से जुड़ी जानकारी जुटा चुकी है।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों से दूरी बनाई है। मैनेजर सचिन भड़ाना के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि अस्पताल के मालिक फिजियोथेरेपिस्ट अमित कुमार हैं, डॉ. वैभव मुद्गल यहां डेंटल OPD करते हैं, लेकिन डॉ. अफजाल, डॉ. रोहित और डॉ. अनुराग से अस्पताल का कोई संबंध नहीं है। प्रबंधन का कहना है कि कानपुर किडनी प्रकरण से उनका कोई कनेक्शन नहीं है और जांच में सहयोग किया जाएगा।
लेकिन दूसरी तरफ कानपुर पुलिस की जांच का दायरा फैलता दिख रहा है। कानपुर में इस रैकेट का खुलासा 50 हजार रुपये के भुगतान विवाद से हुआ और कम से कम 40 अवैध सर्जरी किए जाने का संदेह जताया गया।
कानपुर से मेरठ तक कैसे पहुंची जांच
इस पूरे प्रकरण की जड़ कानपुर में पकड़े गए कथित अवैध ट्रांसप्लांट नेटवर्क तक जाती है। पुलिस ने डॉक्टरों सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया है और शुरुआती जांच में यह आशंका जताई है कि गरीब और आर्थिक रूप से दबाव में आए लोगों को डोनर बनाया जाता था, जबकि रिसीवर पक्ष से कहीं ज्यादा रकम वसूली जाती थी।
पुलिस का दावा है कि अनुराग, अफजल और वैभव मेरठ के एक अस्पताल से जुड़े थे, जबकि रोहित नेटवर्क की मुख्य भूमिका में था। इसी कड़ी ने मेरठ कनेक्शन को जांच के केंद्र में ला दिया। लुकआउट नोटिस जारी किए जाने और अलग-अलग शहरों में दबिश की बात भी सामने आई है।
अस्पताल का पिछला रिकॉर्ड अब फिर चर्चा में
अल्फा हॉस्पिटल पहली बार चर्चा में नहीं आया है। एक लकवा ग्रस्त मरीज को मेडिकल कॉलेज से निजी अस्पताल में शिफ्ट करने, अधिक वसूली और गलत बिलिंग के आरोपों के बाद CMO ने अस्पताल का लाइसेंस निलंबित किया था और मेडिकल थाने में प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी।






