वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में फूलबंगला सेवा पर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। शुक्रवार शाम भी फूलबंगला नहीं सजा, जिसके बाद मामला सिर्फ नाराजगी तक सीमित नहीं रहा। अब 9 अप्रैल को होने वाली समिति की बैठक में यह तय हो सकता है कि फूलबंगला सेवा आगे भी सेवायतों के जरिए चलेगी या समिति इसे अपने हाथ में ले लेगी। यह विवाद ऐसे समय उभरा है जब मंदिर में गर्मी के मौसम की पारंपरिक सेवा शुरू हो चुकी है।
29 मार्च से कामदा एकादशी पर इस बार का पहला फूलबंगला सजना शुरू हुआ था। मंदिर व्यवस्था से जुड़े प्रकाशित विवरणों के अनुसार, इस वर्ष अधिक मास के कारण यह सेवा लंबी अवधि तक चलनी है और 12 अगस्त हरियाली अमावस तक ऐसे दर्शन होने हैं। मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि पिछले छह दिनों में तीन बार श्रद्धालुओं को ठाकुरजी के दर्शन बिना फूलबंगला के हुए।
शुक्रवार शाम मंदिर की सेवा देख रहे सेवायत उमंग गोस्वामी ने भी फूलबंगला नहीं सजाया। अब सवाल यह है कि अगर यही स्थिति जारी रही, तो वह परंपरा क्या होगी जिसके लिए श्रद्धालु पहले से बुकिंग कराते रहे हैं। फूलबंगला सिर्फ सजावट नहीं माना जाता। गर्मी के दिनों में ठाकुरजी को शीतलता देने के लिए फूलों से विशेष बंगला सजाया जाता है। यही वजह है कि हर साल इसे लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह रहता है, और सेवा को लेकर पहले से तैयारी होती है।
विवाद की जड़ शुल्क बढ़ोतरी को माना जा रहा है। पहले एक फूलबंगला के लिए 15 हजार रुपये मंदिर कोष में जमा किए जाते थे, लेकिन इस बार यह राशि बढ़ाकर 1.51 लाख रुपये कर दी गई। यहीं से सेवायतों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी। सेवायत पक्ष की आपत्ति सिर्फ शुल्क तक सीमित नहीं बताई जा रही। आपत्ति यह भी है कि मंदिर के जगमोहन पर श्रद्धालुओं के पूजन को लेकर पहले जैसी छूट नहीं है।
फूलबंगला सजवाने वाले कई श्रद्धालु पहले इसी स्थान पर पूजन करते रहे हैं। ऐसे में उनका सवाल है कि जब पूजन की पुरानी व्यवस्था नहीं रहेगी, तो फिर महंगी सेवा लेने का उत्साह क्यों बना रहेगा। यह टकराव अब सीधे व्यवस्था बनाम परंपरा की बहस में बदलता दिख रहा है। समिति की अगली बैठक अब इस पूरे विवाद का केंद्र बन गई है। समिति से जुड़े सदस्य दिनेश गोस्वामी का कहना है कि पहले भी फूलबंगला सेवा समिति के अधिकार क्षेत्र में लेने का प्रस्ताव आया था, जिस पर आपत्ति जताई गई थी।
अब वही मुद्दा फिर से उठ सकता है। यानी 9 अप्रैल की बैठक सिर्फ एक प्रशासनिक बैठक नहीं होगी। यह तय करेगी कि बांकेबिहारी मंदिर में फूलबंगला सेवा की कमान किसके हाथ में रहेगी। अगर समिति ने सेवा अपने हाथ में ले ली, तो वर्षों से चली आ रही व्यवस्था का ढांचा बदल सकता है। और अगर समझौता हुआ, तो शुल्क और पूजन व्यवस्था पर बीच का रास्ता निकल सकता है। फिलहाल श्रद्धालुओं की नजर इसी बैठक पर टिकी है।





