स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं, यूपी उपभोक्ताओं को राहत

स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर केंद्र सरकार ने लोकसभा में बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं हैं, बल्कि यह उपभोक्ता की पसंद पर आधारित व्यवस्था है। इसका मतलब यह है कि Electricity Act, 2003 के तहत सभी मौजूदा उपभोक्ताओं पर प्रीपेड मीटर थोपना कानून की सीधी शर्त नहीं माना जा सकता।

यह जवाब केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 2 अप्रैल 2026 को लोकसभा में दिया। सवाल नगीना सांसद चंद्रशेखर और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने उठाया था। सरकार ने अपने लिखित जवाब में कहा कि Section 47(5) के तहत उपभोक्ता यदि प्री-पेमेंट मीटर के जरिए बिजली लेना चाहता है, तो वितरण कंपनी को उसे यह सुविधा देनी होगी और उस स्थिति में सुरक्षा जमा भी नहीं लिया जाएगा।

कानून क्या कहता है, असली बिंदु यही है

Electricity Act, 2003 की धारा 47(5) का मूल अर्थ यह है कि अगर कोई उपभोक्ता प्री पेमेंट मीटर (pre-payment meter) के जरिए बिजली लेना चाहता है, तो लाइसेंसी उससे सामान्य सुरक्षा जमा नहीं मांग सकता। इसी कानूनी प्रावधान के आधार पर केंद्र ने संसद में यह लाइन रखी कि प्रीपेड मीटर वैकल्पिक व्यवस्था है, कोई सार्वभौमिक अनिवार्यता नहीं। यही वह बिंदु है जिसने स्मार्ट मीटर बहस को नया मोड़ दिया है।

इसे भी पढ़ें:  दलाल संगठनों के खिलाफ डीएम दफ्तर पर धरना-धर्मेन्द्र मलिक ने की कार्रवाई की मांग

सरकार ने यह भी माना कि स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को देशभर में Revamped Distribution Sector Scheme (RDSS) के तहत बढ़ावा दिया जा रहा है। यह योजना जुलाई 2021 में शुरू हुई थी और इसका लक्ष्य डिस्कॉम की वित्तीय हालत, बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और बिलिंग दक्षता सुधारना है। लेकिन संसद में सरकार ने यह रेखांकित किया कि उसका तरीका यह प्रोत्साहित करने के लिए है, लागू करने के लिए नहीं।

यूपी के लिए यह मामला इतना बड़ा क्यों है

यूपी में यह मुद्दा इसलिए ज्यादा संवेदनशील है, क्योंकि यहां स्मार्ट मीटर रोलआउट बहुत बड़े पैमाने पर हुआ है। संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 84.5 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 75.5 लाख प्रीपेड मोड में हैं। इतना ही नहीं, करीब 53 लाख स्मार्ट प्रीपेड उपभोक्ताओं पर 1,670 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया भी बताया गया है। यानी यह बहस सिर्फ तकनीक की नहीं, सीधे जेब और सप्लाई दोनों की है।

इसे भी पढ़ें:  MUZAFFARNAGAR PALIKA-वार्ड 33 में 22 फैंसी लाइटों का लोकार्पण

यही वजह है कि संसद में आया यह स्पष्टीकरण यूपी के लाखों उपभोक्ताओं के लिए अहम माना जा रहा है। अब सवाल यह है कि जिन इलाकों में उपभोक्ताओं को लगा कि उन्हें बिना स्पष्ट विकल्प के प्रीपेड ढांचे में धकेला गया, वहां यह जवाब क्या नई कानूनी और प्रशासनिक बहस को जन्म देगा।

लेकिन सरकार ने एक रास्ता खुला भी छोड़ा

यहां एक और बिंदु अहम है। संसद में सरकार ने यह भी संकेत दिया कि आदतन चूककर्ता, यानी ऐसे उपभोक्ता जो लगातार भुगतान से बचते हैं, उन्हें प्रीपेड व्यवस्था में शिफ्ट किया जा सकता है। सरकार का तर्क है कि डिस्कॉम को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए राजस्व भी चाहिए। यानी सामान्य उपभोक्ता के लिए विकल्प की बात कही गई है, लेकिन लगातार बकाया रखने वालों के मामले में सख्त रुख की गुंजाइश छोड़ी गई है।

इसे भी पढ़ें:  MUZAFFARNAGAR-लैपटाॅप फटने से कारखाने में लगी आग, मचा हड़कम्प

यह स्पष्टीकरण अभी क्यों अहम है

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर शिकायतें तेज रही हैं। UPERC ने हाल में सभी डिस्कॉम से उन शिकायतों पर जवाब मांगा था, जिनमें रिचार्ज के बाद भी सप्लाई बहाल होने में देरी और बड़े पैमाने पर कटौती जैसे मुद्दे उठे थे। यानी संसद का जवाब सिर्फ कानूनी व्याख्या नहीं, जमीनी विवाद के बीच आया संदेश भी है।

सीधी बात यही है: स्मार्ट मीटर का रोलआउट जारी है, लेकिन “प्रीपेड ही लेना होगा” वाली लाइन अब संसद के जवाब के बाद पहले जैसी सीधी नहीं रह गई। आगे असली नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य की बिजली कंपनियां इस स्पष्टीकरण को जमीनी स्तर पर कैसे लागू करती हैं, और उपभोक्ता को वास्तव में कितना विकल्प मिलता है।

Also Read This

मुजफ्फरनगर न्यायिक ढांचे में बड़ा फेरबदल, 8 नए जजों की तैनाती

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वार्षिक स्थानांतरण-2026 के तहत 7 जजों का तबादला, न्यायिक दंपत्तियों की एक साथ पोस्टिंग चर्चा में मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और गतिशील बनाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। वार्षिक स्थानांतरण-2026 के तहत प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर न्यायिक अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है, जिसका असर मुजफ्फरनगर जनपद में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जारी वार्षिक स्थानांतरण-2026 सूची के तहत प्रदेश के 266 अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल का सीधा प्रभाव मुजफ्फरनगर की न्यायिक व्यवस्था पर

Read More »

भतीजी की ससुराल गया परिवार, सूने घर को चोरों ने बनाया निशाना

ताला तोड़कर लाखों के जेवरात, नकदी और करीब एक किलो चांदी चोरी, पुलिस जांच में जुटी मुजफ्फरनगर। शाहपुर क्षेत्र के एक गांव में चोरों ने बंद पड़े मकान को निशाना बनाते हुए बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया। शातिर चोर घर की अलमारियों से लाखों रुपये कीमत के जेवर, चांदी और नकदी लेकर फरार हो गये। परिवार के घर लौटने पर घटना का खुलासा हुआ, जिसके बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया है। थाना शाहपुर क्षेत्र स्थित ग्राम पलड़ी में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक परिवार के सूने घर में चोरी की बड़ी घटना सामने आई। परिवार भतीजी की शादी के बाद उसकी ससुराल गया हुआ

Read More »

Muzaffarnagar: बैंकट हॉल मालिक से मांगी 50 लाख की रंगदारी, हत्या की धमकी

शिकायत पर कोतवाली में पिता-पुत्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज, सीसीटीवी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जांच शुरू (Muzaffarnagar) मुजफ्फरनगर। शहर में एक बार फिर रंगदारी और भूमि कब्जाने और हत्या की धमकी देने के आरोपों से जुड़ा मामला सामने आया है। बैंकट हॉल संचालक को न केवल भारी रकम की मांग के साथ धमकाया गया, बल्कि परिवार सहित गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मुजफ्फरनगर के गौशाला नदी रोड स्थित एक बैंकट हॉल (आरकेड फार्म) के मालिक को 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी

Read More »

Muzaffarnagar: तेज रफ्तार बाइक ने साइकिल सवार बुजुर्ग को कुचला, इलाज के दौरान मौत

13 दिन बाद बेटे ने अज्ञात बाइक सवार के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा, सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस (Muzaffarnagar)मुजफ्फरनगर। शहर में सड़क हादसों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामले में एक तेज रफ्तार बाइक सवार की लापरवाही ने साइकिल से जा रहे बुजुर्ग की जान ले ली। गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग ने अस्पतालों में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। अब घटना के 13 दिन बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। नगर कोतवाली क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे का मामला सामने आया है, जिसमें साइकिल से जा रहे बुजुर्ग को तेज रफ्तार

Read More »

खतौली तालाब कब्जा मामला: फर्जी बैनामे का आरोप, जांच शुरू

खतौली तहसील के समाधान दिवस में सरकारी तालाब और चकरोड की जमीन पर कथित कब्जे का मामला फिर गरमा गया। ग्राम गंगधाड़ी निवासी अजय चौहान ने प्रशासन को शिकायत देकर आरोप लगाया कि गांव की सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है और उसे वैध दिखाने के लिए कथित फर्जी बैनामा भी कराया गया। मामले को गंभीर मानते हुए SDM ललित मिश्रा ने जांच के आदेश दिए हैं। शिकायत के मुताबिक विवाद सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है। आरोप है कि जिस भूमि को तालाब और सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित होना चाहिए था, उसी पर निजी स्वामित्व का दावा खड़ा कर दिया गया। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता का

Read More »