पालिका में शुरू हुआ शक्ति प्रदर्शन का दौर, भाजपा के सामने भाजपा ही मचा रही शोर

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् के मौजूदा बोर्ड में अब शक्ति प्रदर्शन का दौर शुरू हो चुका है। शहर के विकास को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबका साथ सबका विकास की नीति को आत्मसात करने वाली चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने अपनी सूझबूझ से पालिका में बहुमत की राजनीति को खत्म करते हुए बोर्ड में सत्ता और विपक्ष के खेल को ही समाप्त कर एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया, लेकिन सभासदों और पालिका के अधिकारी एवं कर्मचारियों की आपसी खींचतान के कारण अब टाउनहाल में एक दूसरे के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन की पिक्चर सामने आने लगी है। बोर्ड मीटिंग में इसका पहला प्रदर्शन हुआ, जब भाजपा सभासदों के विरोध में भाजपा के ही सभासदों ने उठकर जमकर शोर मचाया था। भाजपा सभासद दल में हुए दो फाड़ का यह मामला पार्टी के जिलाध्यक्ष तक पहुंच गया है।

नगरपालिका परिषद् के मौजूदा बोर्ड में भाजपा सदन में संख्याबल के आधार पर बहुत मजबूत है। अभी तक पालिका में बहुमत का खेल हावी रहा है। बहुमत हासिल करने के लिए इससे पूर्व सभी चेयरमैनों को दाम, साम, दण्ड और भेद सभी रणनीतियों को अपनाते हुए देखा गया है, लेकिन भाजपा के टिकट पर जीतकर पालिका की मुखिया और नगर की प्रथम महिला बनी मीनाक्षी स्वरूप का भाग्य यहां भी तेज निकला। उनकी अगुवाई में भाजपा ने चेयरमैनी तो हासिल की ही, सदन में संख्याबल के आधार पर बहुमत भी पा लिया। 55 सदस्यों वाले बोर्ड में भाजपा पूर्ण बहुमत रखती है। इसके बावजूद भी चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने सदन में पहली बैठक से ही यह साफ कर दिया कि उनकी नीति सबका साथ सबका विकास और सभी का विश्वास जीतने वाली रहेगी। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति पर अमल करते हुए उन्होंने अनेक ऐसे फैसले लिये, जो जनता ने सराहे। अपनी सूझबूझ और बिना भेदभाव वाली नीति के कारण पालिका में सत्ता और विपक्ष की लड़ाई का खेल खत्म करने वाली चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के लिए अब भाजपा गुट के सभासदों और कर्मचारियों में गुटबंदी को समाप्त करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

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20 जुलाई को टाउनहाल में हुई पालिका की बोर्ड मीटिंग के दौरान जो तस्वीर उभरकर सामने आई, उसने साफ कर दिया है कि भले ही चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के सामने सदन में कोई विपक्ष नहीं है, लेकिन भाजपा ही भाजपा के सामने विपक्ष बनकर उभर रही है। वार्ड संख्या 49 से भाजपा के टिकट पर मनोज वर्मा चुनाव जीते हैं। कई बार के सभासद मनोज भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। उनके वार्ड में 15 लाख रुपये की फैन्सी स्ट्रीट लाइट लगवाने के प्रस्ताव का भाजपा के वार्ड 19 से सभासद योगेश मित्तल ने अपने गुट के सदस्यों के साथ मिलकर मुखर विरोध किया। मनोज वर्मा पर आरोप लगाये तो हंगामा खड़ा हो गया। मामला यहीं तक नहीं रूका। सूत्रों के अनुसार योगेश मित्तल ने बोर्ड मीटिंग खत्म होने के बाद भाजपा कार्यालय पर भाजपा के कुछ सदस्यों के साथ मीटिंग की और इसमें मुद्दा सभासद राजीव शर्मा और मनोज वर्मा ही रहे। बताया गया कि इसमें योगेश मित्तल ने अपनी ही पार्टी के सभासदों के खिलाफ मुखर बयानबाजी करते हुए मोर्चा खोल दिया। सूत्रों का कहना है कि योगेश मित्तल ने भाजपा कार्यालय पर मीटिंग में भाजपा के ही कई सभासदों को नहीं बुलाया। उन्होंने केवल अपने पक्ष के ही भाजपाई सदस्यों को अपने साथ रखा। वहीं सूत्रों ने बताया कि योगेश मित्तल की इस मीटिंग के बाद राजीव शर्मा और मनोज वर्मा ने भी अपने पक्ष का प्रदर्शन करने के लिए शहर के एक होटल में गोपनीय मीटिंग की, जिसमें अधिकांश सभासद उनके साथ दिखाई दिये। इनमें भाजपा के सदस्य तो शामिल थे ही, दूसरे दलों और निर्दलीय सभासदों ने भी योगेश मित्तल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सभासदों की इस खींचतान को पूरा असर पालिका में दिखाई दे रहा है। कर्मचारियों और अधिकारियों में भी दो गुट दिखाई दे रहे हैं। ज्यादातर महिला सभासद ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह के साथ मजबूती से खड़ी नजर आ रही हैं, तो दूसरे अधिकारियों को भी कुछ सभासद सपोर्ट कर रहे हैं। इस खींचतान का मुख्य आधार राजीव शर्मा द्वारा की गई शिकायतों को ही बताया जा रहा है। इनमें अधिकांश शिकायत पालिका कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ ही हैं।

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सभासद योगेश मित्तल का कहना है कि पालिका के वर्तमान बोर्ड में भाजपा की चेयरमैन है, भाजपा के सदस्य सदन में संख्याबल के आधार पर मजबूत हैं। चेयरमैन के पक्ष में सदन में भाजपाई सदस्यों के संख्याबल के आधार पर बहुमत पूरा है। ऐसे में शिकायतबाजी के बजाये विकास की राजनीति होनी चाहिए। हम पार्टी गाइडलाइन के खिलाफ नहीं है, लेकिन कुछ लोग पालिका नहीं चलने दे रहे हैं। अधिकारियों को काम नहीं करने दे रहे हैं। जिससे चेयरपर्सन के विकास के एजेंडे को झटका लग रहा है। हम कुछ लोगों की मोनोपॉली नहीं चलने देंगे। हमने पिछले दिनों भाजपा कार्यालय पर अन्य भाजपाई सभासदों के साथ पार्टी के जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी से मुलाकात की थी। पालिका में चल रहे कुछ प्रमुख मामलों को उनके सामने रखा था। उनसे यही आग्रह किया गया कि कुछ लोगों की झूठी शिकायतों के कारण पार्टी की छवि खराब हो रही है। उनको रोकने का काम किया जाये, ताकि विकास की नीति को सुगमता से लागू किया जा सके। एक ही वार्ड 49 में चेयरमैन को गुमराह करते हुए 15 लाख रुपये की फैंसी लाइट पास करा ली गई। यह नीति भेदभाव को जन्म देती है। हमने सदन में इसका विरोध किया है। ऐसे मामलों में सभी की सहमति से काम होने चाहिए। पालिका में चेयरमैन और अधिकारी अच्छे हैं, लेकिन उनको शिकायतबाजी के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है, इसका खामियाजा सीधे तौर पर जनता को ही भुगतना पड़ता है।

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हम किसी भी जांच को तैयार, राजवीर पर करेंगे मानहानिक का दावा

मुजफ्फरनगर। सभासद राजीव शर्मा और मनोज वर्मा का कहना है कि हमारा किसी से कोई निजी विरोध नहीं है। हम पालिका में हो रहे अनियमितता के खेल के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत करते हुए अनैतिक कार्य किये हैं। अवैध नियुक्तियां हुई, बिना डीपीसी का पालन किये अवैध रूप से पदोन्नति पा ली गई। सर्विस बुक जो विभागों में होनी चाहिए, वो गायब हैं, कुछ कर्मचारियों ने उनको अपने घरों में रखा हुआ है। ऐसे में उनको वेतन जारी किया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है और गंभीर वित्तीय अनियमितता में आता है। इसके साथ ही फर्जी एफडीआर का मामला चेयरपर्सन को फंसाने के लिए बनाया गया है। हम मजबूती के साथ अपनी चेयरपर्सन के साथ खड़े हैं। हमारा विकास के एजेंडे का विरोध नहीं है। उन्होंने कहा कि राजवीर सिंह नामक व्यक्ति ने उनके खिलाफ करीब तीन करोड़ रुपये की अनियमितता की शिकायता की है। इस किसी भी जांच का सामना करने को तैयार हैं। हमारा यही कहना है कि अगर प्रस्ताव गलत था तो बोर्ड मीटिंग में विभागीय अधिकारी उसको क्यों लेकर आये और वो पास क्यों कराया गया। इसमें निष्पक्ष जांच की मांग हम प्रशासन और शासन से करते हैं, हम जांच में पूरा सहयोग करेंगे। राजीव और मनोज ने कहा कि हम शिकायत करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मानहानि का दावा भी करने जा रहे हैं। वही मनोज वर्मा ने कहा कि उनके वार्ड में फैंसी लाइट का विरोध करने वाले योगेश मित्तल कितने बड़े भाजपाई हैं, यह जनता को और पार्टी को सभी को पता है।

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