एसएसपी कार्यालय घेराव में पुलिस का बड़ा एक्शन, वर्दी फाड़ने की धमकी, यातायात ठप और प्रशासनिक कार्य बाधित करने के आरोप
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के कथित उग्र प्रदर्शन ने कानून-व्यवस्था को गंभीर चुनौती दे दी। एसएसपी कार्यालय के घेराव के दौरान पुलिस अधिकारियों से तीखी नोकझोंक, वर्दी फाड़ने की धमकी और शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप होने के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। मामले में चार बड़े नेताओं सहित करीब 400 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ निषेधाज्ञा के उल्लंघन के साथ ही थानेदार की तहरीर पर पुलिस द्वारा गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के बड़े नेताओं का कथित बड़बोलापन आखिरकार उन पर भारी पड़ गया। तीन जनवरी को आरडीएफ के नाम पर फैक्ट्रियों में कचरा जलाने के आरोप के दौरान चल रही लड़ाई के बीच एसएसपी कार्यालय के घेराव के दौरान पुलिस कर्मियों और अधिकारियों से उलझना, खुलेआम वर्दी फाड़ने की धमकी देना और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करना भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के नेताओं को महंगा पड़ गया। धरने के दौरान ही एसपी सिटी के समक्ष माफीनामा देने और माइक से ही पुलिस का इकबाल बुलंद करने के बावजूद एसएसपी संजय वर्मा ने इसे अस्वीकार करते हुए कठोर कार्रवाई की है।
सिविल लाइन थाना प्रभारी निरीक्षक आशुतोष कुमार द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में दी तहरीर के अनुसार, भाकियू अराजनैतिक के लगभग 400 कार्यकर्ता बिना किसी पूर्व सूचना और अनुमति के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व चार पहिया वाहनों में सवार होकर सुबह करीब 11 बजे एसएसपी कार्यालय पहुंचे। कार्यकर्ता आरडीएफ से भरी गाड़ियों को जनपद की फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में जलाए जाने से हो रहे प्रदूषण पर तत्काल रोक लगाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। थानेदार ने तहरीर में कहा कि धरना-प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लाए गए वाहनों को महावीर चौक से प्रकाश चौक, अंबेडकर तिराहा और झांसी की रानी चौक तक बेतरतीब ढंग से खड़ा कर दिया गया। इससे पूरा मार्ग अवरुद्ध हो गया। स्थिति यह रही कि राजकीय वाहनों और मरीजों के लिए चलाई जा रही एंबुलेंस तक को निकलने का रास्ता नहीं मिल सका। आम नागरिकों के साथ-साथ सरकारी और अर्ध-सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पुलिस के अनुसार, जबकि जनपद में जिलाधिकारी द्वारा पहले से ही धारा 163 बीएनएसएस लागू की गई थी, इस निषेधाज्ञा के बावजूद धरने पर बैठे भाकियू अराजनैतिक के युवा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दिगम्बर सिंह निवासी बिजनौर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मांगेराम त्यागी निवासी स्याना बुलन्दशहर, मोहित त्यागी निवासी बुलन्दशहर और ब्लॉक अध्यक्ष चरथावल ठा. कुशलबीर सिंह निवासी चरथावल समेत अन्य कार्यकर्ताओं ने कार्यालय परिसर में माइक, फ्लैक्सी बोर्ड और बैनर लगाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने हाथों में डंडे लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अपशब्दों का प्रयोग किया। जब प्रभारी निरीक्षक सिविल लाइन द्वारा पुलिस कार्यालय से बैनर और फ्लैक्सी हटाने को कहा गया तो कथित रूप से प्रदर्शनकारियों ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए वर्दी फाड़ने की धमकी दी। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात भी पुलिस ने कही है। थानेदार की तहरीर पर थाना सिविल लाइन में पुलिस ने इस मामले में धारा 191(2), 132, 126(2), 351(2), 352 और 223 बीएनएस के तहत चारों नेताओं और करीब 400 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापत ने कहा कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिस तरह से इस प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने अभद्र बयानबाजी की, पुलिस उसकी जांच कर रही है।






