मुजफ्फरनगर में नहीं होगा पुराने वाहनों का नया पंजीकरण

एनसीआर का हिस्सा होने के कारण केंद्र सरकार का नया नोटिफिकेशन लागू नहीं, 15 साल पुराने वाहनों पर पहले से प्रतिबंध

मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार ने देशभर में 20 साल या उससे अधिक पुराने वाहनों के पंजीकरण नवीनीकरण के नियमों में बदलाव किया है। अब इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण पहले से कहीं महंगा हो जाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन कर नया नोटिफिकेशन जारी किया है।

हालांकि मुजफ्फरनगर जनपद में यह नियम लागू नहीं होगा। एआरटीओ सुशील मिश्रा ने बताया कि जनपद एनसीआर का हिस्सा है, जहां पहले से ही 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों और 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर रोक लगी हुई है।
नये नियम में जेबों पर पड़ेगा ज्यादा भार

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केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से जारी किये गये नये नोटिफिकेशन के अनुसार पुराने वाहनों का नया पंजीकरण नवीनीकरण कराने के लिए शुल्क में काफी बढ़ोतरी की है। इससे अपने पुराने वाहनों का नया पंजीकरण कराने की इच्छा रखने वालों की जेब पर तगडा आर्थिक भार पड़ेगा। इस नोटिफिकेशन में जो शुल्क तय किया गया है, उसके अनुसार निम्न प्रकार से फीस चुकानी होगी। हल्के मोटर वाहन का नवीनीकरण शुल्क अब 5,000 से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है। मोटरसाइकिलों का शुल्क 1,000 से बढ़कर 2,000 रुपये हो गया है। तिपहिया और क्वाड्रिसाइकिलों के लिए शुल्क 3,500 से बढ़कर 5,000 रुपये होगा। आयातित वाहनों पर भारी शुल्क तय किया गया हैकृदोपहिया/तिपहिया के लिए 20,000 रुपये और चारपहिया या उससे बड़े वाहनों के लिए 80,000 रुपये। ये सभी नियम गजट में अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद ही लागू होंगे।

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केन्द्र सरकार ने क्यों बढ़ाया नवीनीकरण शुल्क

केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय के अनुसार, पुराने वाहन सड़क सुरक्षा और पर्यावरण दोनों के लिए खतरनाक हैं। 20 साल पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण महंगा करने के पीछे उद्देश्य यही है कि लोग धीरे-धीरे ऐसे वाहनों को सड़कों से हटाएं। फरवरी में इस प्रस्ताव पर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे और 21 अगस्त को इसे अंतिम रूप दिया गया। दिल्ली-एनसीआर में नया नियम लागू नहीं होगा। यहां पहले से ही 15 साल पुराने पेट्रोल व 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध है। सुप्रीम कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में निर्देश दिया था कि पुराने वाहनों के मालिकों के खिलाफ जबरन कार्रवाई न की जाए, बल्कि वाहन की वास्तविक स्थिति और उपयोग को भी देखा जाए।

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