लखनऊ। अखिलेश यादव भाजपा टकराव बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को दावा किया कि उत्तर प्रदेश भाजपा में सामने आ रहा आपसी टकराव किसी कथित “विद्रोही बैठक” का नतीजा नहीं है, बल्कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में वोटरों के नाम कटने की सूचना से पैदा हुआ असंतोष है।
अखिलेश यादव ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि SIR प्रक्रिया में करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने की जानकारी पहले ही भाजपा विधायकों के बीच पहुंच चुकी है। उन्होंने दावा किया कि इनमें से 85 से 90 प्रतिशत मतदाता मुख्यमंत्री के समर्थक बताए जा रहे हैं। सपा अध्यक्ष के मुताबिक, अगर 2.89 करोड़ मतदाताओं का 85 प्रतिशत भी माना जाए तो यह संख्या लगभग 2.45 करोड़ बैठती है, जिसका असर पूरे प्रदेश की राजनीति पर पड़ेगा।
अखिलेश यादव भाजपा टकराव बयान में उन्होंने गणित समझाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर इसका औसत असर प्रति सीट लगभग 61 हजार वोट के रूप में पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि ऐसी स्थिति में भाजपा हर सीट पर आनुपातिक रूप से भारी नुकसान में रहेगी। अखिलेश यादव ने यहां तक कहा कि अगर यही स्थिति बनी रही तो भाजपा के लिए आगामी चुनाव में दहाई का आंकड़ा पार करना भी मुश्किल हो सकता है।
सपा प्रमुख ने कहा कि यही वजह है कि भाजपा के भीतर आरोप-प्रत्यारोप, खुले नोटिस और सार्वजनिक बयानबाजी जैसी स्थितियां सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा विधायक अलग-अलग बैठकें कर यह संकेत दे रहे हैं कि सरकार, संगठन और सहयोगी दल उनकी बात नहीं सुन रहे।
अखिलेश यादव भाजपा टकराव बयान में सपा प्रमुख ने कहा कि SIR की पूरी प्रक्रिया ने भाजपा को उसी संकट में धकेल दिया है, जिसे उसने खुद पैदा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब भाजपा के अंदर ही इस प्रक्रिया को लेकर डर और बेचैनी साफ दिखाई देने लगी है।






