Budget 2026: 1 फरवरी को संसद में पेश होने वाला केंद्रीय बजट 2026 केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं होगा, बल्कि यह भारत की आर्थिक दिशा को नई परिभाषा देने वाला दस्तावेज साबित हो सकता है। बजट के इतिहास में पहली बार एक ऐसी परंपरा टूटने जा रही है, जो पिछले सात दशकों से चली आ रही थी।
पार्ट-B में दिखेगा भारत का ग्लोबल ब्लूप्रिंट
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट प्रस्तुति की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब तक जहां बजट का बड़ा फोकस टैक्स स्लैब और राजस्व घोषणाओं पर रहता था, वहीं इस बार बजट का पार्ट-B केंद्र में रहेगा और यही हिस्सा भारत के आर्थिक विजन की धुरी बनेगा।
बजट 2026 के पार्ट-B को भारत की आर्थिक सोच का ‘विजन डॉक्यूमेंट’ माना जा रहा है। इसमें केवल कर नीतियों की चर्चा नहीं होगी, बल्कि देश की मौजूदा आर्थिक क्षमता, औद्योगिक ताकत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की भूमिका को विस्तार से रखा जाएगा।
सूत्र बताते हैं कि सरकार का फोकस भारत की लोकल स्ट्रेंथ को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से पेश करने पर रहेगा। मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और घरेलू इनोवेशन को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ने की स्पष्ट रणनीति इस हिस्से में सामने आ सकती है।
भविष्य की अर्थव्यवस्था का रोडमैप
बजट का यह बदला हुआ स्वरूप शॉर्ट-टर्म राहत के साथ-साथ लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को भी प्राथमिकता देगा। पार्ट-B में यह बताया जाएगा कि आने वाले वर्षों में भारत किन सेक्टर्स के जरिए वैश्विक आर्थिक ताकत बनेगा और निवेशकों के लिए कौन-कौन से नए अवसर खुल सकते हैं।
यही वजह है कि बजट 2026 को सिर्फ घरेलू नीति दस्तावेज नहीं, बल्कि ग्लोबल इन्वेस्टमेंट सिग्नल के तौर पर देखा जा रहा है। दुनियाभर के आर्थिक विशेषज्ञ और निवेशक इस बजट से भारत के आर्थिक भविष्य की दिशा को पढ़ने की कोशिश करेंगे।
संक्षेप में, बजट 2026 भारत की आर्थिक कहानी को नए अंदाज में दुनिया के सामने रखने वाला एक निर्णायक पड़ाव बन सकता है।






