यूपी पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा के प्रश्न पर विवाद, सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने सरकार से की माफी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
मुजफ्फरनगर। यूपी पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा के पहले दिन जातिगत आधार पर एक आपत्तिजनक टिप्पणी के साथ प्रश्नपत्र में आए एक सवाल ने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अवसर के अनुसार बदल जाने वाले व्यक्ति सवाल के विकल्प में ‘पंडित’ शब्द शामिल होने पर ब्राह्मण समाज में नाराजगी सामने आई है। समाजवादी पार्टी ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार से माफी मांगने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
यूपी पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा के पहले दिन शनिवार को संपन्न हुई प्रथम पाली की परीक्षा के प्रश्नपत्र में शामिल एक सवाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया। प्रश्न के विकल्प में ‘अवसरवादी पंडित’ शब्द आने पर ब्राह्मण समाज में आक्रोश देखने को मिला और इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और मुजफ्फरनगर से सांसद हरेंद्र मलिक ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि यह गलती अज्ञानतावश हुई या जानबूझकर, दोनों ही स्थितियों में यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार सरकार की मानसिकता ऐसी बन चुकी है कि कभी धर्म और कभी जाति के नाम पर समाज को बांटने की रणनीति बनाई जाती है, जिसका असर अधिकारियों की कार्यशैली में भी दिखाई दे रहा है और यह इसी प्रभाव का परिणाम है। हरेंद्र मलिक ने कहा कि भारतीय संविधान सभी को समान अधिकार देता है और किसी भी समाज या वर्ग को अपमानित करने की अनुमति नहीं देता। ‘पंडित’ शब्द केवल ब्राह्मण समाज की पहचान ही नहीं, बल्कि विद्वान और ज्ञानवान व्यक्ति का भी प्रतीक माना जाता है। ऐसे शब्द को ‘अवसरवादी’ जैसे आपत्तिजनक अवसरवादी व्यक्ति की पहचान के सवाल की श्रेणी में रखना सनातन परंपरा, समस्त सनातनियों और शिक्षाविदों का अपमान है।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन के जन्म से लेकर मृत्यु तक विभिन्न संस्कारों में पंडित की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में परीक्षा के प्रश्नपत्र में इस विद्वान के विपरीत इस तरह के शब्द का प्रयोग करना निंदनीय है और इससे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। सपा सांसद ने सरकार से मांग की कि यदि यह गलती अधिकारियों की है तो जिम्मेदार अधिकारी को चिन्हित कर उसके खिलाफ सख्त और प्रभावी कार्रवाई की जाए। यदि इसमें सरकार की भी कोई भूमिका रही है तो सरकार को सार्वजनिक रूप से समाज से माफी मांगनी चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस मामले में किए गए ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए हरेंद्र मलिक ने कहा कि उन्होंने अभी ट्वीट नहीं देखा है। ट्वीट केवल औपचारिकता है या वास्तविक प्रतिक्रिया, यह पढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगा। उन्होंने कहा कि यह साधारण गलती नहीं है, बल्कि गंभीर प्रतिक्रिया के योग्य मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई सामान्य स्कूल का प्रश्नपत्र नहीं था, बल्कि पुलिस भर्ती जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा का पेपर था, जो सरकार के गृह विभाग के अंतर्गत तैयार होता है। सरकार इसमें सीधे तौर पर शामिल रहती है, ऐसे में इस प्रकार की गलती की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। सरकार को मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषी अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि समाज में सौहार्द बना रहे और सामाजिक सदभाव बनाये रखना सरकार का दायित्व होता है।





