संगठन का नाम न बदलो, अपनी पहचान कायम रखोः राकेश टिकैत

संगठन की पहचान पर दिया जोर-कहा, नाम और पहचान बदलना संघर्ष की आत्मा को कमजोर करता है

मुजफ्फरनगर। शहर में आयोजित युवा संवाद सम्मेलन में किसानों के मुद्दों और संगठनात्मक अनुशासन पर अहम चर्चा हुई। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सम्मेलन में शामिल युवा कार्यकर्ताओं को संगठन की बुनियादी नीतियों से अवगत कराते हुए साफ संदेश दिया कि संगठन की पहचान और सिद्धांत किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने चाहिए। टिकैत ने नाम की एकरूपता को संगठन की मजबूती का आधार बताते हुए कार्यकर्ताओं को अनुशासन, एकता और सही दिशा में संघर्ष की सीख दी।
युवा संवाद सम्मेलन के दौरान भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने संगठनात्मक अनुशासन पर जोर देते हुए कार्यकर्ताओं को अपने भाषण में स्पष्ट संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान जब मंच संचालक ने संगठन का नाम ‘भारतीय किसान यूनियन टिकैत कहा, तो राकेश टिकैत ने उसे बीच में रोकते हुए मंच से ही सुधारने को कहा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि संगठन की पहचान नहीं बदलनी चाहिए। हमारे संगठन का नाम ‘भारतीय किसान यूनियन है और हमें इसी नाम को आगे लेकर चलना है। उन्होंने कहा कि कई अन्य संगठन अपने नाम के साथ अलग-अलग शब्द जोड़कर उसे प्रस्तुत करते हैं, लेकिन इससे उनके संगठन की पहचान है, उन्हें लिखने दो, जो लिख रहे हैं। हमें अपनी पहचान बदलने की जरूरत नहीं है। हमारी पहचान भारतीय किसान यूनियन है और यही आगे भी रहेगी।
टिकैत ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन की सफलता केवल आंदोलनों से नहीं, बल्कि उसकी स्पष्ट पहचान, एकजुटता और अनुशासन से तय होती है। उन्होंने कहा कि हर कार्यकर्ता को यह समझना चाहिए कि संगठन के नाम और उसके बुनियादी ढांचे में बदलाव करने से आंदोलन की दिशा भटक सकती है। अपने संबोधन में टिकैत ने युवाओं को भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवा हमारे संगठन की ताकत हैं। आने वाले समय के संघर्षों में आप ही सबसे आगे होंगे। लेकिन याद रखिएकृअनुशासन, पहचान और संगठन की एकता हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। आंदोलन तभी सफल होते हैं, जब कार्यकर्ता अपनी संगठनात्मक रेखा से न हटें। उन्होंने आगे कहा कि किसानों के हक की लड़ाई लम्बी है और इसमें युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। देश में किसान जिस दौर से गुजर रहा है, उसमें हमारी जवाबदेही और बढ़ जाती है। हमें गांव-गांव जाकर जागरूकता फैलानी है, किसान के हक की बात करनी है और सरकार तक अपनी आवाज़ मजबूती से पहुँचानी है। टिकैत ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया, गांव स्तर के संवाद और संगठनात्मक बैठकों के जरिए युवाओं को जोड़ें, मगर हर मंच पर संगठन की मूल पहचान और दिशा का सम्मान बनाए रखें।

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