पिता ने चार दिव्यांग बेटियों के साथ सल्फास खाकर की खुदकुशी

नई दिल्ली। दिल्ली के वसंतकुंज इलाके में एक व्यक्ति ने अपनी चार दिव्यांग बेटियों के साथ सल्फास खाकर खुदकुशी कर ली। हीरालाल गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था। एक वर्ष पहले उसकी पत्नी की कैंसर से मृत्यु हो गई थी। इसके बाद बेटियों की देखभाल पर ज्यादा समय देने की वजह से छह माह पहले उसकी नौकरी भी चली गई थी। इस घटना ने एक बार फिर 1 जुलाई, 2018 के बुराड़ी कांड की याद दिला दी, जिसमें एक ही परिवार के 11 लोगों ने सामूहिक खुदकुशी कर ली थी। दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त रोहित मीणा ने बताया कि वसंतकुंज के रंगपुरी गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों के खुदकुशी करने की घटना का खुलासा शुक्रवार सुबह हुआ, जब घर से बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी।

मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने भीतर से बंद दरवाजा तोड़ा, तो पांच सड़े-गले शव मिले। पिता हीरालाल का शव एक कमरे में मिला और बेटियां दूसरे कमरे में एक ही बिस्तर पर मृत मिलीं। पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। हीरालाल ने यह कदम उठाने से पहले संतान की लंबी आयु के लिए की जाने वाली जीतिया पूजा भी की थी। उसे सीसीटीवी फुटेज में 24 तारीख को घर के अंदर जाते देखा गया। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच से प्रतीत होता है कि हीरालाल ने पहले बेटियों को सल्फास खिलाया और बाद में खुद खा लिया। शवों के पास से सल्फास की गोलियां और डस्टबिन में जूस के टेट्रा पैक और पानी की बोतल मिली है।

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हीरालाल (46) की चारों बेटियां, नीतू (26), निक्की (24), नीरू (23) और निधि (20) चलने-फिरने में असमर्थ थीं। हीरालाल के भाई मोहन शर्मा और भाभी गुड़िया शर्मा ने बताया कि हीरालाल ने अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद पारिवारिक मामलों में रुचि लेना बंद कर दिया था। पत्नी की मृत्यु के बाद हीरालाल किसी न किसी अस्पताल में अपनी बेटियों का इलाज कराने में व्यस्त रहता था। बेटियां शायद ही कभी कमरे से बाहर निकलती थीं।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, पिता हीरालाल कारपेंटर का काम करता था। हीरालाल पिछले 28 वर्षों से इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर, वसंत कुंज में बढ़ई का काम करता था। उसका वेतन 25 हजार रुपये प्रति माह था। पत्नी की मौत एक साल पहले कैंसर से हुई थी। उसके बाद हीरालाल अकेला पड़ गया था। पत्नी की मौत के बाद वह पूरी तरह टूट चुका था। इस साल जनवरी से वह नियमित तौर पर ड्यूटी पर नहीं पहुंच पा रहा था, जिसकी वजह से उसे निकाल दिया गया था। इससे वह घोर आर्थिक परेशानी से घिर गया था। रंगपुरी में जहां पिता-बेटियों ने खुदकुशी की वह करीब 300 गज में चार मंजिला इमारत है। हर मंजिल पर आठ फ्लैट बने हुए हैं। चौथी मंजिल पर हीरालाल का परिवार रहता था। इमारत में कम से कम 25 परिवार किराये पर रहते हैं। पड़ोसियों का कहना है कि पत्नी सुनीता देवी की मौत के बाद हीरालाल की स्थिति और बिगड़ गई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि लगातार बढ़ती परेशानियों के आगे उसका साहस जवाब दे गया। पड़ोसियों ने बताया कि हीरालाल 2018 में रंगपुरी में परिवार के साथ रहने आया था। जब पत्नी की मौत हुई तो परेशानियों का बोझ बढ़ गया। बच्चों की देखभाल करने के साथ ही हीरालाल काम पर जाता था। इस दौरान दिव्यांग बेटियां अकेले घर में रहती थीं। शाम को घर आकर वह बेटियों के लिए खाना बनाने के साथ ही कपड़े भी धोता था। हीरालाल आखिरी बार 2008 में मां के देहांत पर बिहार स्थित अपने घर गया था।

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चारों बेटियों ने कर रखी थी स्नातक-रंगपुरी से कुछ दूरी पर रहने वाले हीरालाल के भाई मोहन शर्मा की पत्नी गुड़िया ने बताया कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि पूरा परिवार खत्म हो गया। चारों बेटियों ने स्नातक कर रखी थी। नीरू विज्ञान की छात्रा थी। सबसे छोटी बेटी निधि भी पढ़ने में बहुत तेज थी। 2016 में पढ़ाई के दौरान नीरू को दिखना बंद हो गया था। छह महीने से उनकी परिवार से कोई बात नहीं हुई। उन्होंने कई बार बच्चों को फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया।

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मोबाइल की होगी जांच-पुलिस अधिकारी ने बताया कि हीरालाल के परिजनों से मामले में बातचीत की गई है। मोबाइल जांच के लिए एफएसल भेजा गया है। यह भी देखा जा रहा है कि उसने किसी से कर्ज आदि तो नहीं ले रखा था। इसके लिए बैंक खाते भी खंगाले जाएंगे।

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