पांच दशक की राजनीति का तजुर्बा रखते हैं हरेन्द्र

मुजफ्फरनगर। सपा के राष्ट्रीय महासचिव पूर्व सांसद हरेन्द्र मलिक को जनपद ही नहीं वेस्ट यूपी में दिग्गज राजनीतिज्ञ माना जाता है। उनके पास करीब पांच दशक की राजनीति का तजुर्बा है। वो लगातार चार बार विधायक निर्वाचित हुए और चार बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। मुजफ्फरनगर सीट से ही उनका ये चैथा चुनाव है, वो कैराना सीट से भी चुनाव लड़ चुके हैं। हरियाणा की इंडियन नेशनल लोकदल से हरेन्द्र मलिक राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं। दो सदनों की लंबी सियासी पारी खेलने वाले हरेन्द्र मलिक अपने पुत्र पंकज मलिक को तीन बार विधायक बनवाने में भी सफल रहे है। पंकज वर्तमान में चरथावल सीट से सपा के विधायक हैं। लोकदल, जनता दल, कांग्रेस और सपा के सहारे हरेन्द्र मलिक का राजनीतिक सफर आगे बढ़ता रहा है।

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े जाट नेताओं में शुमार और अपना व्यक्तिगत जनाधार रखने वाले हरेन्द्र मलिक साल 1984 के यूपी विधानसभा चुनाव में वो खतौली सीट से लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़े और विधायक बनकर सदन में पहुंचे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर ही नहीं देखा। परिसीमन के बाद खतौली सीट खत्म हुई तो वो जनता दल के टिकट पर अगला चुनाव 1989 में बघरा सीट से लड़े और इसके बाद सात वर्षों में इस सीट पर तीन बार विधायक बने। वो लगातार चार बार विधायक निर्वाचित हुए। खतौली और बघरा के शुरूआती चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशियों सुरेन्द्र शर्मा और बाबू सिंह को पराजित किया था। इसके बाद भाजपा के सामने ही वो चुनाव लड़ते रहे हैं। बघरा से ही भाजपा के प्रत्याशी प्रदीप बालियान को 1991 और 1993 की राम मंदिर आंदोलन की लहर में हरेन्द्र मलिक ने पराजित किया। हालांकि 1996 के चुनाव में इसी सीट पर भाजपा ने तीसरी बार प्रदीप बालियान को टिकट दिया तो इस चुनाव में प्रदीप ने हरेन्द्र मलिक को हरा दिया था। प्रदीप ने 51168 वोट लिये तो हरेन्द्र को 44573 मत मिले थे। इसके बाद हरेन्द्र मलिके ने 1998 और 1999 में सपा प्रत्याशी के रूप में तो 2009 में कांग्रेस के टिकट पर मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, जबकि 2019 में वो कैराना से सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। इन चारों लोकसभा चुनाव में वो पराजित रहे, लेकिन 2009 के मुजफ्फरनगर सीट के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर हरेन्द्र मलिक ने अपना व्यक्तिगत जनाधार साबित किया था, क्योंकि जिले में कांग्रेस को जनाधारहीन माना जाता रहा है। इस चुनाव में उनको 73848 मत मिले थे। इससे पहले वो 2002 में ओमप्रकाश चैटाला की पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल से राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए। हरेन्द्र मलिक ने अपनी विरासत अपने बेटे पंकज मलिक को सौंपी और बघरा, शामली तथा चरथावल से वो पंकज को विधायक बनाने में सफल रहे। 2022 में चरथावल विधानसभा से सपा के टिकट पर पंकज मलिक चुनाव लड़े, यहां भाजपा को पराजित किया, जबकि योगी मैजिक के साथ ही चरथावल सीट पर भाजपा प्रत्याशी सपना कश्यप के पक्ष में सहानुभूति की लहर भी थी।

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