जीपीएस सिस्टम पर पालिका का सिस्टम फेल, कंपनी का भुगतान रोका

कंपनी ने ईओ से की शिकायत, दो बार इंजीनियर आकर चला गया, लेकिन विभाग ने ठीक नहीं कराये वाहनों के जीपीएस
ईओ ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी से तलब की रिपोर्ट, कंपनी को जल्द वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश, दो साल से चक्कर काट रही कंपनी 

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् में सिस्टम पूरी तहर से धींगामुश्ती का बन चला है। पालिका की चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप हों या फिर नई अधिशासी अधिकारी डॉ. प्रज्ञा सिंह उनके सामने आये दिन पालिका अफसरों और कर्मचारियों की लापरवाही, हठधर्मी और विभागीय दायित्वों के प्रति हीला-हवाली के रोजमर्रा ऐसे-ऐसे प्रकरण आते हैं, जो पालिका के बेलगाम सिस्टम की गवाही देने का प्रमाण हैं। ऐसे ही एक मामले में पालिका के स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और कर्मचारियों की लापरवाही और धींगामुश्ती सामने आई है। पालिका में साफ सफाई और अन्य कार्यों में लगे वाहनों की तकनीकी निगरानी के लिए जीपीएस ट्रैकर ;ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टमद्ध लगवाने का काम किया गया था ताकि सफाई व्यवस्था में लगे वाहन चालकों और कर्मियों की निगरानी के साथ ही उनको जिम्मेदार भी बनाया जा सके। स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत प्राप्त बजट के सहारे 73 वाहनों में जीपीएस ट्रैकर लगाने के लिए पालिका प्रशासन ने 2022 में टैण्डर निकाला था। इसमें कई कंपनियों ने अपनी निविदा डाली और अंततः इसके लिए इंदौर की कंपनी बैच मास्टर सॉफ्टवेयर प्रा.लि. की निविदा स्वीकृत की गई थी। मार्च 2022 में वर्क ऑर्डर मिलने के बाद कंपनी ने अपने इंजीनियर भेजे और पालिका के स्वास्थ्य विभाग के द्वारा 71 वाहन कंपनी के लोगों को उपलब्ध कराये गये, जिनमें कंपनी ने जीपीएस ट्रैकर लगा दिए थे। इसमें कंपनी के अनुबंध के साथ पालिका ने यह शर्त भी लगाई थी कि वाहनों में लगाये गये जीपीएस ट्रैकर के रखरखाव के लिए कंपनी तीन साल तक अपनी सेवा प्रदान करेगी। जीपीएस ट्रैकर खराब होता है तो कंपनी को अपने खर्च पर ही उसको सही कराना होगा। कंपनी ने इसी शर्त पर काम किया और काम खत्म करने के बाद कंपनी द्वारा निर्धारित खर्च के हिसाब से 3 लाख 89 हजार 366 रुपये का बिल भुगतान के लिए 2022 में ही पालिका के स्वास्थ्य विभाग को भेजकर भुगतान की डिमांड की, लेकिन दो साल से ज्यादा का समय व्यतीत होने के बावजूद भी पालिका की ओर से कंपनी को भुगतान ही नहीं दिया गया है। जबकि इन दो सालों में वाहनों में लगाये गये जीपीएस ट्रैकर भी अधिकांश खराब हो गये हैं। पालिका के स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही और कंपनी का भुगतान रोकने के कारण कई सवाल उठाये जा रहे हैं। कंपनी की ओर से इस मामले में ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह से मौखिक और लिखित शिकायत करते हुए भुगतान मांगा। ईओ ने मामले में नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल कुमार को तलब करते हुए रिपोर्ट मांगी, तो बखेड़ा खड़ा हो गया और स्वास्थ्य विभाग के अफसर व कर्मचारियों ने कंपनी पर अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया तथा शर्त के अनुसार वाहनों का रखरखाव नहीं करने, खराब जीपीएस ट्रैकर नहीं बदलने के कारण ही भुगतान रोकने की जानकारी ईओ को दी। ईओ ने कंपनी के इंजीनियर को स्वास्थ्य विभाग की शिकायत के बारे में बताया और रखरखाव नहीं करने पर आड़े हाथों लिया तो स्वास्थ्य विभाग के दावों की सारी पोल खुलती नजर आई, क्योंकि कंपनी रखरखाव की शर्त का पालन कराने के लिए लगातार अपना इंजीनियर इंदौर से यहां भेजती रही, इंजीनियर के लाख प्रयासों के बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी खराब जीपीएस वाले वाहन ठीक कराने के लिए उपलब्ध कराने से आना-कानी करते रहे। 

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कंपनी ने अपनी शिकायत में ईओ को बताया कि भुगतान की मांग करने के बाद नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल कुमार ने 20 मार्च 2024 को कंपनी को अवगत कराया था कि 71 में से 68 वाहनों में लगाये गये जीपीएस ट्रैकर काम नहीं कर रहे हैं। उनको ठीक करने के लिए कंपनी ने इंजीनियर सौरभ थोराट को यहां भेज दिया था। इंजीनियर ने आकर नगर स्वास्थ्य अधिकारी से सम्पर्क किया और खराब जीपीएस वाले वाहन उपलब्ध कराने के लिए कहा। आरोप है कि तीन दिनों के प्रयासों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग से इंजीनियर को केवल 18 वाहन ही उपलब्ध कराये गये, जिनके जीपीएस ट्रैकर ठीक करा दिये गये थे। काफी इंतजार के बाद भी जब अन्य वाहन नहीं दिये गये तो कंपनी ने अपना इंजीनियर वापस बुला लिया था। इसके बाद 2 अपै्रल को कंपनी ने फिर से इंजीनियर को यहां भेजा। कई दिनों तक चक्कर कटवाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने केवल एक वाहन ही उपलब्ध कराया। अब 13 अपै्रल को कंपनी ने ईओ से शिकायत करते हुए अपना भुगतान मांगा है। 

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स्वास्थ्य विभाग का ढुलमुल रवैया देखकर ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह नाराज

मुजफ्फरनगर। ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह का कहना है कि पालिका के वाहनों में जीपीएस ट्रैकर लगाने का कार्य 2022 में किया गया था। पिछले दिनों कंपनी से आये इंजीनियर ने उनसे मुलाकात कर शिकायत की थी कि कंपनी का भुगतान स्वास्थ्य विभाग द्वारा रोका गया है, उनको न तो वाहन उपलब्ध कराये जा रहे हैं और न ही भुगतान ही दिया जा रहा है। मामले में नगर स्वास्थ्य अधिकारी से रिपोर्ट तलब की गई थी, जिसमें 68 वाहनों के जीपीएस खराब होने की बात कही गयी। कंपनी को उनको ठीक कराने के लिए कहा गया था, जो अनुबंध की शर्त में शामिल है। अब कंपनी की शिकायत है कि स्वास्थ्य विभाग से खराब जीपीएस वाले वाहन ही उपलब्ध नहीं कराये जा रहे हैं। इसके लिए एनएसए के साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के लिपिक आकाशदीप को निर्देशित किया गया है कि वो कंपनी के इंजीनियर को जल्द ही सभी वाहन उपलब्ध कराकर जीपीएस ठीक करायें और भुगतान की प्रक्रिया को भी पूरा किया जाये। उन्होंने इस मामले में सख्त रवैया अपनाते हुए इस बात पर नाराजगी जताई कि कंपनी काम करने को तैयार है, तो उनको वाहन उपलब्ध कराने में इतनी हीला हवाली क्यों की जा रही है। यदि कंपनी रखरखाव नहीं करती है तो ही भुगतान रोका जाये और इसके लिए कंपनी को नोटिस भी जारी किया जाये। उन्होंने कहा कि यदि मामले का जल्द निपटारा नहीं किया जाता है तो संबंधित के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने लिपिक को तीन दिनों में सभी वाहनों में जीपीसी ट्रैकर सही कराने और कार्य निपटने के बाद उनको रिपोर्ट करने के लिए कहा है।

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