भारत-अमेरिका डीलः अब धर्मेन्द्र मलिक ने मारा जुबानी डंक

भारत सरकार के समझौते का किया समर्थन, कहा-पंजाब से नहीं मिल रहा डील का विरोध करने वाले नेताजी को कोई साथ

मुजफ्फरनगर। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज है। एक ओर किसान संगठनों का विरोध जारी है, तो दूसरी ओर किसान राजनीति से जुड़े नेताओं के बीच बयानबाजी ने माहौल को और गरमा दिया है। सोशल मीडिया पर हो रही टिप्पणियां अब सीधे नेतृत्व पर निशाना साध रही हैं। भाकियू प्रमुख नरेश टिकैत और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच हलवाई का ततैया वाली टिप्पणी के बाद चल रही सियासी तीर के बीच भाकियू नेता धर्मेन्द्र मलिक ने भी जुबानी डंक मारने का काम किया है। उनका कहना है कि ‘नेताजी बौखलाहट’ में हैं।

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही बहस के बीच भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार का हिस्सा राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के शीर्ष नेतृत्व के बीच शीत युद्ध की स्थिति बनती दिख रही है। हाल ही में दिया गया हलवाई का ततैया, संबंधी बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा और विवाद का कारण बना हुआ है। इस बयान के बाद प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है और सियासी तीर एक-दूसरे पर जमकर छोड़े जा रहे हैं। इसी क्रम में टिकैत परिवार से अलग होकर किसान संगठन चला रहे भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने भी सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर परोक्ष रूप से भाकियू नेताओं नरेश टिकैत और राकेश टिकैत पर टिप्पणी की है।

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धर्मेन्द्र मलिक ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर फैलाए जा रहे झूठ को पंजाब से समर्थन न मिलने के कारण नेताजी बौखलाहट में हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती, यानी एक ही रणनीति बार-बार सफल नहीं होती। एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में धर्मेन्द्र मलिक ने भारत सरकार द्वारा अमेरिका के साथ किए गए इस समझौते का समर्थन किया। उन्होंने डील शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसे व्यापारिक समझौता बताया और कहा कि यह समझौता व्यापक स्तर पर प्रभावशाली और लाभकारी सिद्ध हो सकता है। उनके अनुसार भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक संबंध आज वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दिशा तय कर रहे हैं। यह केवल व्यापारिक अनुबंध नहीं, बल्कि एक नई रणनीतिक साझेदारी का स्वरूप है।
उन्होंने निवेश, तकनीक, रक्षा, कृषि, डिजिटल अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। मलिक के मुताबिक यह समझौता बाजार के विस्तार, निर्यात में वृद्धि, रोजगार सृजन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा। धर्मेन्द्र मलिक ने कहा कि यह सहयोग लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी विश्वास पर आधारित है, जो साझा समृद्धि की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो सकता है। उनका मानना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को आर्थिक और रणनीतिक रूप से मजबूत करने के लिए इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां आवश्यक हैं।

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