ईरान युद्ध का असर: कहीं वर्क फ्रॉम होम तो कहीं लॉकडाउन जैसे हालात

पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध ने दुनिया के कई देशों की स्थिति बिगाड़ दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही ठप होने के कारण ईंधन आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है, जिससे कई देशों को आपात कदम उठाने पड़े हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि यह स्थिति लोगों को कोरोना काल की याद दिला रही है। ईरान ने स्पष्ट कहा है कि वह अमेरिका और उसके हितों वाले जहाजों को होर्मुज से गुजरने नहीं देगा, जिसके बाद एशियाई देशों में ईंधन की भारी कमी देखी जा रही है।

ईरान युद्ध के चलते दुनिया की लगभग पांचवां हिस्सा ईंधन खपत प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही रुकने से सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ा है। इसका सीधा असर ऊर्जा कीमतों पर पड़ा है, जिससे आम लोगों और सरकारों दोनों के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। ईंधन संकट के चलते फ़िलिपींस ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है। राष्ट्रपति फ़र्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने कहा कि देश में ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

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सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं: हफ्ते में चार दिन काम करने का निर्देश, लंच ब्रेक में कंप्यूटर बंद रखने का आदेश, एयर कंडीशनिंग का तापमान 24 डिग्री से नीचे न करने की सीमा बताया गया है कि 20 मार्च तक देश के पास केवल 45 दिनों का तेल भंडार बचा है। ईरान युद्ध का असर पाकिस्तान में भी साफ दिख रहा है, जहां तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। बिना औपचारिक घोषणा के जेट ईंधन और केरोसिन महंगे हो गए हैं। वहीं, वियतनाम में लोगों से ईंधन बचाने के लिए घर से काम करने की अपील की गई है। सरकार ने कंपनियों को यात्रा और परिवहन कम करने के निर्देश दिए हैं।

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बांग्लादेश ने हालात को देखते हुए सभी विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया है और ईंधन की राशनिंग लागू कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश का जीवाश्म ईंधन आयात बिल 4.8 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है। श्रीलंका में भी हालात गंभीर हैं: सड़कों की लाइटें, नियॉन साइन और बिलबोर्ड बंद, सरकारी संस्थानों में एयर कंडीशनिंग कम करने के निर्देश, चार दिन का कार्य सप्ताह लागू  ईरान युद्ध के चलते पैदा हुई स्थिति ने दुनिया को फिर से कोरोना काल जैसे प्रतिबंधों और संकट की याद दिला दी है।

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कई देशों में ऊर्जा बचाने के लिए वर्क फ्रॉम होम, सीमित सेवाएं और आपातकाल जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबी चली, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।

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