कानपुर VIP रोड पर रईसजादे का कहर, लैंबॉर्गिनी से कई को रौंदा, शिवम मिश्रा हिरासत

कानपुर। रविवार 8 फरवरी की दोपहर कानपुर की वीआईपी रोड पर तेज रफ्तार ने कहर बरपा दिया। सड़क पर दौड़ती एक महंगी स्पोर्ट्स कार ने कुछ ही पलों में अफरा-तफरी मचा दी। कार चला रहा युवक सामने जो भी आया, उसे कुचलता चला गया। हादसे में कई लोग घायल हुए, जबकि कुछ को टक्कर लगने के बाद करीब दस फीट तक उछलते हुए देखा गया।

पुलिस जांच में सामने आया कि कार चालक शिवम मिश्रा, शहर के चर्चित तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा है। हादसे के बाद पुलिस ने शिवम मिश्रा को हिरासत में ले लिया है। घटना में उसकी बेहद महंगी लैंबॉर्गिनी कार को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है।

बताया जा रहा है कि शिवम मिश्रा ऐशो-आराम भरी जिंदगी जीने का शौकीन है। उसके पास करोड़ों रुपये की लग्जरी गाड़ियों का कलेक्शन है और वह अक्सर महंगी घड़ियों और ब्रांडेड सामान के साथ नजर आता है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दिल्ली के वसंत विहार स्थित उसके ठिकाने से कई लग्जरी वाहन जब्त किए जा चुके हैं।

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जांच में यह भी सामने आया है कि शिवम की अधिकतर गाड़ियों की नंबर प्लेट पर एक ही खास नंबर 4018 अंकित था। जब्त वाहनों में रोल्स-रॉयस फैंटम, मैकलेरन, पोर्शे, और लैंबॉर्गिनी रेवुएल्टो जैसी सुपर लग्जरी कारें शामिल हैं। इन गाड़ियों की कुल अनुमानित कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

आयकर विभाग की पूर्व की कार्रवाई के दौरान शिवम और उससे जुड़े ठिकानों से भारी मात्रा में नकदी और कीमती सामान बरामद किया गया था। शुरुआती छापेमारी में करीब 4.5 करोड़ रुपये नकद मिले थे, जबकि बाद की तलाशी में 7 करोड़ रुपये नकद, जेवरात और अन्य कीमती वस्तुएं सामने आईं। इनमें एक हीरों से जड़ी घड़ी भी शामिल थी, जिसकी कीमत लगभग 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई।

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शिवम मिश्रा के पिता केके मिश्रा की कारोबारी गतिविधियां भी पहले जांच के घेरे में आ चुकी हैं। वर्ष 2024 में उनकी कंपनी बंशिधर टोबैको प्राइवेट लिमिटेड पर प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग ने एक साथ कार्रवाई की थी। यह छापेमारी कई राज्यों में चली थी।

आयकर विभाग ने कानपुर, दिल्ली, मुंबई और गुजरात समेत कुल 20 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। जांच एजेंसियों का दावा था कि कंपनी की घोषित आय और वास्तविक कारोबार में बड़ा अंतर है। रिपोर्टों के मुताबिक, जहां कंपनी सालाना 20–25 करोड़ रुपये का कारोबार दिखा रही थी, वहीं असल लेन-देन 100 से 150 करोड़ रुपये के बीच होने की आशंका जताई गई थी।

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अधिकारियों को संदेह था कि टैक्स और जीएसटी नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ खातों में हेरफेर और ऑफशोर लेन-देन के जरिए आय छिपाने की कोशिश की गई।

फिलहाल, कानपुर की वीआईपी रोड पर हुई इस घटना ने एक बार फिर रईसजादों की बेलगाम रफ्तार, रसूख और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस मामले की हर पहलू से जांच में जुटी है।

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