लेबनान में हिजबुल्लाह पर प्रतिबंध की घोषणा प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने सोमवार को की। यह फैसला हिजबुल्लाह द्वारा इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने के बाद आया, जिन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला बताया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि लेबनानी क्षेत्र से वैध संस्थाओं के बाहर की गई किसी भी सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह अस्वीकार किया जाएगा। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जारी बयान में प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि युद्ध और शांति का फैसला केवल राज्य के हाथ में है।
उन्होंने हिजबुल्लाह की सभी सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों को ‘गैरकानूनी’ बताते हुए उन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने मांग की कि हिजबुल्लाह अपने हथियार लेबनानी राज्य को सौंप दे और अपनी भूमिका को केवल राजनीतिक क्षेत्र तक सीमित करे। दरअसल, अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान पर हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या हुई। इसके जवाब में पूरे क्षेत्र में तेहरान की ओर से प्रतिक्रिया देखी गई।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा 1982 में स्थापित हिजबुल्लाह ने कहा कि उसका हमला शनिवार को हुए बम विस्फोट में मारे गए खामेनेई के ‘शुद्ध रक्त’ का बदला लेने के लिए था। इजरायल ने तनाव बढ़ाने के लिए हिजबुल्लाह को जिम्मेदार ठहराया और हिजबुल्लाह के नेता नईम कासिम को ‘समाप्ति का लक्ष्य’ घोषित कर हमले शुरू कर दिए। सोमवार तड़के इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर लगातार हवाई हमले किए। इससे पहले हिजबुल्लाह ने सीमा पार इजरायल की ओर मिसाइलें दागी थीं।
इजरायली सेना ने लेबनान के लगभग 50 गांवों के निवासियों से संभावित हमलों के मद्देनजर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। इजरायली सेना के अनुसार सीमा पार से आई एक मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जबकि कई अन्य मिसाइलें खुले इलाकों में गिरीं। इन हमलों में किसी के घायल होने या किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। वहीं, हिजबुल्लाह ने बयान जारी कर कहा कि ये हमले अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या और इजरायल की बार-बार की आक्रामक कार्रवाइयों के जवाब में किए गए हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच लेबनान में हिजबुल्लाह पर प्रतिबंध का यह फैसला क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों पर दूरगामी असर डाल सकता है।






