मुजफ्फरनगर-पालिका प्रशासन से नहीं बनी बात, मंगलवार को हड़ताल

कर्मचारी संगठन ने तीन दिन पहले ईओ को दिया था पत्र, कर्मचारियों का वेतन जारी नहीं करने पर दी थी कार्य बहिष्कार और कामबंद हड़ताल की चेतावनी

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका प्रशासन और कर्मचारियों के बीच तनातनी अब हड़ताल की कगार पर पहुंच ही गई है। ऑडिट टीम की रिपोर्ट और लगातार लापरवाही के आरोपों के बाद नगर पालिका प्रशासन ने दो अधिकारियों सहित 12 कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है। इस कार्रवाई से नाराज कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारी संगठन ने तीन दिन पहले ही ईओ को पत्र सौंपकर चेतावनी दी थी कि यदि समय पर वेतन जारी नहीं किया गया तो कामबंद हड़ताल की जाएगी। इसको लेकर कर्मचारी नेताओं से कोई वार्ता नहीं होने के कारण अब मंगलवार से कर्मचारी कार्य बहिष्कार और पूर्ण हड़ताल पर उतरने की तैयारी कर चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि कुछ प्रकरणों की शिकायत के आधार पर शासन ने स्वास्थ्य विभाग, निर्माण विभाग, संपत्ति विभाग और कर विभाग का विशेष ऑडिट कराये जाने के निर्देश दिये थे। इसको लेकर विशेष ऑडिट टीम नामित करते हुए नगरपालिका में यह कार्य प्रारम्भ भी कर दिया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग, निर्माण विभाग और कर विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा ऑडिट टीम को वांछित दस्तावेज, सूचना और प्रकरणों से जुड़ी पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराये जाने की शिकायत टीम प्रभारी ने ईओ डॉ. प्रज्ञा से की और शासन में भी रिपोर्ट भेज दी थी। इसी को लेकर ईओ ने दो अधिकारियों और कुछ कर्मचारियों का वेतन पत्रावलियां उपलब्ध कराने तक रोक दिया। इसके साथ ही कुछ कर्मचारियों पर बिना बताये अवकाश पर चले जाने, निर्देशों का उल्लंघन और कार्य के प्रति लापरवाही के आरोप में भी ईओ ने वेतन रोकने और काटने के निर्देश लेखाकार प्रीति रानी को दिये थे। इसी को लेकर बखेड़ा खड़ा हो गया है।
स्वायत्त शासन कर्मचारी संगठन उत्तर प्रदेश की शाखा अध्यक्ष ब्रजमोहन और महामंत्री सुनील वर्मा ने बताया कि ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह द्वारा एई निर्माण नेपाल सिंह, कार्यवाहक कर अधीक्षक पारूल यादव के साथ ही लिपिक प्रवीण कुमार, फिरोज खान, राजीव वर्मा, नितिन कुमार, शोभित सिंघल के अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मियों वसीम अहमद, अरूण कुमार, इमरान, बिजेन्द्र कुमार आदि का वेतन रोका गया है। ये सीधे तौर पर कर्मियों का उत्पीड़न है और इस निर्णय से कर्मचारियों में अत्यन्त नाराजगी है। संगठन ने 12 सितम्बर को ईओ को पत्र लिखकर समाधान की मांग की थी, चेतावनी दी गई कि यदि समाधान नहीं होता है तो कार्य बहिष्कार किया जायेगा। इसके लिए माना जा रहा था कि ईओ संग वार्ता से समाधान हो जायेगा, लेकिन सोमवार को ईओ और संगठन के नेताओं के बीच वार्ता नहीं होने के कारण हड़ताल का संकट गहरा गया है।

यूनियन अध्यक्ष ब्रजमोहन ने कहा कि आज उनको कर्मचारियों के वेतन संकट के समाधान के लिए वार्ता के लिए नहीं बुलाया गया है, तीन दिन का समय दिया गया था, जो सोमवार को पूरा हो गया है। यूनियन ने मंगलवार से कार्य बहिष्कार के साथ ही बेमियादी कामबंद हड़ताल की तैयारी कर ली है। सभी कर्मियों का वेतन जारी होने तक आंदोलन जारी रखा जायेगा। वहीं ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह का कहना है कि वेतन को लेकर टकराव जैसी कोई स्थिति नहीं है, वो पूरे दिन अपने कार्यालय में विभागीय कामकाज निपटाने के लिए उपस्थित रही। इन सम्बंध में उनके साथ वार्ता करने के लिए कोई नहीं आया। बिना बताये अवकाश पर रहने के कारण लिपिक नितिन, फिरोज और शोभित का एक दिन का वेतन काटा गया है, पूरा वेतन नहीं रोका गया। उनका वेतन जारी कर दिया गया है, दूसरे मामलों में भी लेखाकार को नियमानुसार कार्यवाही के लिए कहा गया है। ऑडिट टीम की आपत्ति और शिकायत के आधार पर कुछ लोगों का वेतन जरूर रोका गया है, जो शासन का मेटर है। संगठन का पत्र भी उनको आज ही प्राप्त हुआ है। हड़ताल पर जाने जैसा कोई मुद्दा ही नहीं है।

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